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पश्चिम एशिया के तनाव का प्रभाव..कसोल-तोश के  पर्यटन स्थलों पर असर, विदेशी पर्यटकों को लेकर बढ़ी चिंता

समर एक्सप्रेस /शिमला-:पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का प्रभाव हिमाचल प्रदेश के उन पर्यटन क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है जिन्हें अनौपचारिक रूप से “मिनी इज़रायल” कहा जाता है। पर्यटन से जुड़े स्थानीय लोगों का कहना है कि हालात के कारण विदेशी पर्यटकों, खासकर इज़रायली यात्रियों की संख्या प्रभावित हो सकती है।

कुल्लू जिले के कसोल, तोश और पुरानी मनाली जैसे बैकपैकर गंतव्य, साथ ही कांगड़ा जिले का धर्मकोट लंबे समय से इज़रायल से आने वाले पर्यटकों के बीच लोकप्रिय रहे हैं। खासकर पार्वती घाटी में पिछले कुछ वर्षों में एक अलग बैकपैकर संस्कृति विकसित हुई है, जहां बड़ी संख्या में इज़रायली पर्यटक लंबे समय तक रुकते हैं। इसी वजह से इन इलाकों को पर्यटक अक्सर “मिनी इज़रायल” के नाम से पुकारते हैं।

दरअसल, इज़रायल में अनिवार्य सैन्य सेवा पूरी करने के बाद कई युवा लंबी यात्रा पर निकलते हैं और हिमालयी क्षेत्रों में हफ्तों या महीनों तक ठहरना पसंद करते हैं। उनकी इस लंबी अवधि की मौजूदगी से स्थानीय पर्यटन कारोबार—जैसे गेस्टहाउस, कैफे और ट्रैवल सेवाओं—को लगातार आय मिलती है। कसोल और आसपास के इलाकों में हिब्रू भाषा के साइनबोर्ड, इज़रायली व्यंजन जैसे शाकशुका और फलाफल परोसने वाले कैफे, तथा खास तौर पर इज़रायली पर्यटकों के लिए बने गेस्टहाउस आम दृश्य बन चुके हैं।

स्थानीय कारोबारी  के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के चलते कुछ इज़रायली पर्यटक अपनी यात्रा जल्दी समाप्त कर घर लौटने की तैयारी कर रहे हैं। इससे राज्य के छोटे और मध्यम श्रेणी के होटलों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि से टैक्सी सेवाओं और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों की लागत भी बढ़ सकती है।हिमाचल प्रदेश का पर्यटन क्षेत्र अभी भी महामारी के प्रभाव से पूरी तरह उबरने की कोशिश कर रहा है। वर्ष 2019 में राज्य में लगभग 3.82 लाख विदेशी पर्यटक आए थे, लेकिन कोविड-19 के कारण 2020 में यह संख्या घटकर करीब 43 हजार और 2021 में लगभग 5,500 रह गई थी। इसके बाद धीरे-धीरे सुधार हुआ और 2022 में लगभग 29 हजार, 2023 में करीब 62,800 तथा 2024 में करीब 82 हजार विदेशी पर्यटक राज्य में पहुंचे।पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही इज़रायली पर्यटक कुल संख्या में सबसे बड़ा विदेशी समूह नहीं हैं, लेकिन उनका लंबे समय तक ठहरना कुल्लू और कांगड़ा जैसे क्षेत्रों के छोटे पर्यटन कारोबार के लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

Chandrika

chandrika@summerexpress.in

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