समर एक्सप्रेस /शिमला, संजू -:हिमाचल प्रदेश सरकार में राजस्व और जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने प्रदेश के पूर्व राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला के कार्यकाल पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल के कार्यकाल में जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर न्याय नहीं हुआ। नेगी ने कहा कि खासकर “नौतोड़” से जुड़े मामलों में लंबे समय तक मंजूरी न मिलना सीमा क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय लोगों के साथ अन्याय के समान है।
शिमला में मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि उन्होंने नौतोड़ के मुद्दे को लेकर कई बार राज्यपाल से मुलाकात करने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी। उनके अनुसार वह आठ बार राज्यपाल से मिले और नौवीं बार मिलने की भी कोशिश की, लेकिन उस दौरान भी इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि यह मामला करीब तीन वर्षों तक लंबित रहा, जिससे जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।नेगी ने यह भी कहा कि यदि राज्यपाल को किसी मुद्दे पर पूरी जानकारी नहीं दी जा रही थी, तो संवैधानिक पद पर होने के नाते उन्हें उचित कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से संतुलित और जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है, लेकिन कुछ मामलों में ऐसा देखने को नहीं मिला।
राज्यपाल द्वारा हिमाचल प्रदेश के “वर्क कल्चर” को लेकर दिए गए बयान पर भी मंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तरह का बयान देना एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए उचित नहीं है। उनके मुताबिक, यदि किसी प्रकार की प्रशासनिक समस्या थी तो उसे संस्थागत तरीके से हल किया जाना चाहिए था, न कि सार्वजनिक मंचों से इस प्रकार की टिप्पणी करनी चाहिए थी।मंत्री ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल और नेता जनजातीय समुदाय के मुद्दों को लेकर संवेदनशील नहीं रहे हैं।
इस दौरान मंत्री ने नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर के बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हर विषय पर टिप्पणी करना जरूरी नहीं होता और किसी एक व्यक्ति को सभी मुद्दों का विशेषज्ञ नहीं माना जा सकता। राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इस विषय पर विपक्ष की ओर से स्पष्ट रुख सामने नहीं आ रहा है।नेगी ने जयराम ठाकुर के उस बयान पर भी पलटवार किया जिसमें कहा गया था कि प्रदेश में “मंत्रिमंडल नहीं, मित्र मंडल सरकार चला रहा है।” इस पर उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में किस प्रकार का ‘मित्र मंडल’ सक्रिय था, यह प्रदेश की जनता भली-भांति जानती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की मौजूदा आर्थिक स्थिति के लिए पिछली सरकार भी जिम्मेदार रही है।
इसके अलावा मंत्री ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश पर कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है और गलत नीतियों के कारण आम जनता को आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है। उन्होंने महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर भी चिंता व्यक्त की।पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल से जुड़े विवाद पर बोलते हुए नेगी ने नरेंद्र मोदी और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि कुछ मौकों पर राष्ट्रपति के सम्मान से जुड़े प्रोटोकॉल का ठीक तरह से पालन नहीं किया गया। उन्होंने द्रोपदी मुर्मू के सम्मान की बात उठाते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों के प्रति सभी को सम्मान दिखाना चाहिए।नेगी ने इस मुद्दे पर ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए कहा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठा रही हैं और ऐसे मामलों में स्पष्ट रुख अपनाना जरूरी है। मंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी संवैधानिक संस्थाओं और पदों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।