समर एक्सप्रेस /संजू -:हिमाचल प्रदेश में जनजातीय मुद्दों को लेकर सियासी माहौल गर्माता जा रहा है। जनजातीय मामलों को लेकर दिए गए मंत्री जगत सिंह नेगी के हालिया बयान पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद को लेकर की गई टिप्पणी उचित नहीं है और इससे राजनीतिक माहौल अनावश्यक रूप से विवादित हो रहा है।
किन्नौर से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी और पार्टी नेता सूरत नेगी ने शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री जगत सिंह नेगी के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा दिया गया बयान न केवल अनुचित है, बल्कि इससे जनजातीय समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भी भटक रहा है। सूरत नेगी ने आरोप लगाया कि जनजातीय क्षेत्रों के कई अहम मुद्दों का समाधान अब तक नहीं हो पाया है और सरकार को इन विषयों पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि नौतोड़ का मुद्दा कोई नया विषय नहीं है, बल्कि पिछले दो से ढाई दशकों से यह चर्चा में रहा है। उनके अनुसार, पूर्व में कांग्रेस सरकार ने इस मामले में लोगों को कई आश्वासन दिए थे, लेकिन जमीन पर अपेक्षित समाधान नहीं निकल पाया। उन्होंने बताया कि फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट, 1980 से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी कई बार चर्चा हुई, लेकिन 2006 में जो “लैंडलेस” की शर्त जोड़ी गई थी, उसे हटाने की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई।
सूरत नेगी ने कहा कि वर्ष 2017 में जयराम ठाकुर के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार ने इस पूरे मामले का अध्ययन करवाया और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को राहत देने के लिए इस शर्त को हटाने का रास्ता खोजने की कोशिश की। हालांकि उस समय यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण तत्काल निर्णय संभव नहीं हो पाया।उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार के दौरान ट्राइबल सब प्लान के तहत तीनों जनजातीय विधानसभा क्षेत्रों के लिए करीब 400 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। वहीं उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इस बजट में कमी आई है। सूरत नेगी ने कहा कि पंचायत चुनाव नजदीक आने के चलते राजनीतिक बयानबाजी तेज हो रही है, लेकिन जनजातीय क्षेत्रों के विकास और समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।