धर्मशाला | राहुल चावला-:भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन शनिवार को हिमाचल प्रदेश के दौरे पर धर्मशाला पहुंचे, जहां उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के 9वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को डिग्रियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए तथा उन्हें देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
उपराष्ट्रपति के कांगड़ा हवाई अड्डे पर पहुंचने पर हाल ही में नियुक्त हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कवींद्र गुप्ता, प्रदेश के कृषि मंत्री प्रो. चौधरी चंद्र कुमार, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर और कांगड़ा-चंबा के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। कांगड़ा पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।दीक्षांत समारोह स्थल पर पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने उपराष्ट्रपति का पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया और उन्हें कांगड़ा पेंटिंग व पारंपरिक वाद्य यंत्र ‘नरसिंगा’ भेंट कर सम्मानित किया।
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 12 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए और 8 विद्यार्थियों को मंच पर डिग्रियां दीं। उन्होंने सभी स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने का सशक्त साधन है। उन्होंने विशेष रूप से यह देखकर खुशी जताई कि इस बार पदक विजेताओं में बड़ी संख्या छात्राओं की है, जो देश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सशक्तिकरण का प्रतीक है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने बताया कि इस वर्ष आयोजित 9वें दीक्षांत समारोह में कुल 509 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 33 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई, जबकि शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 32 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान सभी विद्यार्थियों ने भारतीय पारंपरिक परिधानों में मंच पर जाकर अपनी उपाधियां ग्रहण कीं, जिससे कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली।अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने हिमाचल प्रदेश को देवभूमि और वीरभूमि बताते हुए कहा कि यह प्रदेश देश की सशस्त्र सेनाओं में उल्लेखनीय योगदान देता रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और अतिथि सत्कार के लिए पूरे देश में जाना जाता है।उन्होंने विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि वे फैकल्टी विकास, अनुसंधान और नवाचार को प्राथमिकता दें तथा आपसी सहयोग को बढ़ावा दें, ताकि भारत की शिक्षा प्रणाली वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सके।
उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में देश के युवा और छात्र सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने समावेशी विकास पर जोर देते हुए कहा कि प्रगति की इस यात्रा में देश के किसी भी राज्य या समाज के किसी भी वर्ग को पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए।