Summer express, चंडीगढ़।हरियाणा की राजनीति में लंबे समय से जातीय समीकरण अहम भूमिका निभाते रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने पिछले एक दशक में इन्हीं सामाजिक समीकरणों को अपने पक्ष में मजबूत करने के लिए रणनीतिक तरीके से नेतृत्व परिवर्तन किए हैं। अब पार्टी ने गैर-जाट वोट बैंक को और मजबूत करने के उद्देश्य से वैश्य समुदाय पर बड़ा दांव खेला है।
भाजपा ने 2023 के बाद अपनी संगठनात्मक रणनीति में बदलाव करते हुए पिछड़ा वर्ग, ब्राह्मण और अब वैश्य समाज को प्रमुख प्रतिनिधित्व देना शुरू किया है। इसी कड़ी में डॉ. अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने को महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनावों को देखते हुए अपने कोर गैर-जाट वोट बैंक को और मजबूत करने में जुटी है।
2014 में पहली बार हरियाणा की सत्ता में आने के दौरान भाजपा ने जाट और गैर-जाट संतुलन की नीति अपनाई थी। उस समय पार्टी ने सुभाष बराला और बाद में ओमप्रकाश धनखड़ जैसे जाट नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर जाट मतदाताओं को साधने की कोशिश की। हालांकि समय के साथ पार्टी की रणनीति बदली और अब फोकस गैर-जाट वर्गों के व्यापक सामाजिक संतुलन पर दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्वयं पिछड़ा वर्ग से आते हैं। भाजपा ने पहले उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया, फिर ब्राह्मण समाज से जुड़े मोहन लाल बड़ौली को जिम्मेदारी सौंपी और अब वैश्य समाज से आने वाली डॉ. अर्चना गुप्ता को प्रदेश नेतृत्व देकर नए राजनीतिक संकेत दिए हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार हरियाणा में वैश्य समुदाय का करीब 7 से 8 प्रतिशत वोट शेयर है और शहरी क्षेत्रों में उसका प्रभाव काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। 2024 के चुनावों में इस समुदाय के कई प्रमुख नेताओं की हार के बाद पार्टी के भीतर प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। ऐसे में अर्चना गुप्ता की नियुक्ति को संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा संगठन में जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को आगे बढ़ाने की नीति पर भी लगातार काम कर रही है। महिला जिला अध्यक्ष से प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचीं डॉ. अर्चना गुप्ता का राजनीतिक सफर इसी रणनीति का उदाहरण माना जा रहा है।
इसके साथ ही भाजपा महिलाओं को नेतृत्व में आगे लाने का भी स्पष्ट संदेश दे रही है। दिल्ली में रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री और हरियाणा में अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने को महिला सशक्तिकरण और महिला वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।