Summer Express, फरीदाबाद | जिले में पिछले दस वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां विकसित होने का मामला सामने आया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में फरीदाबाद में कुल 1017 अवैध कॉलोनियां बसाई गईं। मामले को गंभीरता से लेते हुए अब जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
यह जांच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देश पर की जा रही है। अदालत ने अवैध कॉलोनियों से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। यह याचिका गुरुग्राम निवासी अशोक मुंजाल की ओर से दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियां बस रही हैं, लेकिन संबंधित विभाग समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने जिले में पिछले दस वर्षों में विकसित हुई अवैध कॉलोनियों का पूरा डाटा तैयार कर लिया है। साथ ही उन अधिकारियों की सूची भी मांगी गई है, जो उस समय संबंधित विभागों में तैनात थे और जिनकी जिम्मेदारी अवैध कॉलोनियों को विकसित होने से रोकने की थी। यह पूरी रिपोर्ट अधिकारियों के नामों के साथ हाई कोर्ट में पेश की जाएगी।
एसीबी के पुलिस अधीक्षक अनिल यादव ने बताया कि कॉलोनियों से संबंधित आंकड़े तैयार हो चुके हैं, लेकिन संबंधित विभागों से जिम्मेदार अधिकारियों की सूची अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। इसके लिए दो बार रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक करीब 500 अवैध कॉलोनियां ग्रेटर फरीदाबाद क्षेत्र में विकसित हुई हैं। इसके अलावा पृथला, आईएमटी, बसंतपुर, पल्ला, सेहतपुर, अगवानपुर, ददसिया, टिकावली और वजीरपुर जैसे इलाकों में भी बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां बसाई गईं। इन क्षेत्रों में 300 से अधिक कॉलोनियों के विकसित होने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीण और एचएसवीपी के अधीन आने वाले क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों को रोकने की जिम्मेदारी जिला नगर योजनाकार (इन्फोर्समेंट) की होती है। वहीं नगर निगम क्षेत्र में यह जिम्मेदारी नगर निगम के तोड़फोड़ विभाग के एसडीओ पर होती है। इन अधिकारियों को अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने, तोड़फोड़ करने और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का अधिकार होता है।
हाई कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो को सात अहम बिंदुओं पर जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। इनमें पिछले दस वर्षों में बसाई गई अवैध कॉलोनियों की संख्या, उस समय तैनात अधिकारी, सरकार को हुए राजस्व नुकसान का आकलन, अवैध कॉलोनियों को रोकने के लिए उठाए गए कदम, कॉलोनी बसाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में हुई देरी के कारण तथा दर्ज मामलों की वर्तमान स्थिति और अंतिम परिणाम शामिल हैं।