Summer express /राहुल चावला, धर्मशाला -: हिमाचल प्रदेश की जेल व्यवस्था में ‘हिमकारा’ योजना एक सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिख रही है। इस पहल के तहत अब जेलों को केवल सजा देने की जगह नहीं, बल्कि सुधार, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। धर्मशाला स्थित लाला लाजपत राय जिला एवं मुक्त सुधार गृह में इस योजना के तहत कैदियों को विभिन्न रोजगारपरक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
हिमकारा योजना के अंतर्गत जेल परिसर में ही बेकरी, फास्ट फूड यूनिट, कार वॉश, डेयरी, कारपेंट्री, वेल्डिंग, सैलून और फूलों की नर्सरी जैसे कार्य संचालित किए जा रहे हैं। इन इकाइयों में तैयार उत्पादों को ‘हिमकारा’ ब्रांड के तहत बाजार में भी उतारा जा रहा है। इससे न केवल कैदियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल रहा है, बल्कि उनमें कार्य अनुशासन और आत्मविश्वास भी विकसित हो रहा है।
जेल में कार्यरत बंदियों का कहना है कि इस योजना ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। उन्हें नए कौशल सीखने का अवसर मिला है, जो रिहाई के बाद रोजगार या स्वरोजगार के लिए मददगार साबित होगा। कई बंदी अपनी कमाई का एक हिस्सा अपने परिवारों को भी भेज रहे हैं, जिससे उनके परिवारों को आर्थिक सहारा मिल रहा है।
जेल अधीक्षक विकास भटनागर के अनुसार ‘हिमकारा’ केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक सोच है, जिसका उद्देश्य कैदियों को सुधार कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक वापस लाना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से कैदियों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।1913 में स्थापित यह सुधार गृह स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से भी जुड़ा रहा है और अब यह पुनर्वास और सुधार की दिशा में एक नई मिसाल बनकर उभर रहा है। ‘हिमकारा’ योजना यह संदेश देती है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो भटके हुए लोग भी समाज में सम्मान के साथ नई शुरुआत कर सकते हैं।