Summer Express, हिसार | हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (गुजवि) स्वदेशी ड्रोन तकनीक विकसित कर राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान देगा। विश्वविद्यालय न केवल रक्षा क्षेत्र में बल्कि कृषि, उद्योग, चिकित्सा, यातायात और निगरानी जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करेगा।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि विश्वविद्यालय में ड्रोन टेक्नोलॉजी-सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है। इसके साथ ही गुजवि ने भारतीय सेना की दक्षिण पश्चिमी कमान और नाभास्त्र प्राइवेट लिमिटेड के साथ एमओयू साइन किए हैं। यह समझौता रक्षा क्षेत्र में ड्रोन तकनीक पर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देगा। विश्वविद्यालय परिसर में डीजीसीए दिशा-निर्देशों के अनुसार डीजीसीए अनुमोदित रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन भी स्थापित किया जाएगा।
गुजवि आगामी शैक्षणिक सत्र से रोजगारोन्मुख ड्रोन पायलट कोर्स शुरू करेगा। इस कोर्स के माध्यम से युवा ड्रोन पायलट तैयार किए जाएंगे, जो विभिन्न परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने और मिशन पूरा करने में सक्षम होंगे। प्रशिक्षण पूरा करने पर छात्रों को प्रमाणपत्र के साथ डीजीसीए से अनुमोदित लाइसेंस भी मिलेगा। कुलपति ने कहा कि इस पहल से युवाओं के लिए सम्मानजनक और तकनीकी रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
प्रो. बिश्नोई ने यह भी बताया कि वर्तमान में ड्रोन तकनीक ने वैश्विक स्तर पर निगरानी और रक्षा क्षेत्र में क्रांति ला दी है। विश्वविद्यालय का यह प्रयास न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारत के लिए आत्मनिर्भर और आधुनिक ड्रोन निर्माण की दिशा में भी ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
गुजवि का यह कार्यक्रम तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ ही देश के रक्षा और नागरिक क्षेत्र में स्वदेशी ड्रोन निर्माण को मजबूती देगा।