Summer express, शिमला | हिमाचल प्रदेश में परवाणू से शिमला तक बनने वाले 38 किलोमीटर लंबे रोपवे का सपना जल्द हकीकत बन जाएगा। यह देश का सबसे लंबा रोपवे प्रोजेक्ट है, जिसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर विकसित किया जा रहा है। हाल ही में सरकार ने टेंडर की शर्तों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे परियोजना और निवेशकों दोनों के लिए अनुकूल माहौल तैयार हुआ है।
पहले इस रोपवे के लिए सालाना 10 लाख यात्रियों की संख्या तय की गई थी, जिसे अब घटाकर आठ लाख कर दिया गया है। इसके साथ ही यदि सालाना आठ लाख से कम यात्री रोपवे का उपयोग करते हैं, तो सरकार कंपनी को हुए नुकसान की भरपाई करेगी। राज्य सरकार ने कंपनी के लिए चार महीने की अतिरिक्त अवधि देने का भी प्रावधान रखा है, जिससे निवेशकों का जोखिम कम हो सके।
यह परियोजना अगले 40 वर्षों तक कंपनी के नियंत्रण में रहेगी, और यदि किसी वर्ष में कंपनी को नुकसान होता है, तो हर वर्ष के लिए चार महीने अतिरिक्त अवधि दी जाएगी। प्रतिमाह कमाई का एक हिस्सा राज्य सरकार को मिलेगा।
रोपवे एंड रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलपमेंट कारपोरेशन ने इस परियोजना के लिए टेंडर जारी किए हैं। अदाणी इंटरप्राइजेज समेत अन्य कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है। आरटीडीसी ने टाटा कंसल्टेंसी से डीपीआर तैयार करवाई है और सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं।
परियोजना आठ चरणों में पूरी होगी और इसमें एक घंटे में 3,000 से 5,000 यात्रियों को सेवाएं दी जा सकेंगी। रोपवे के मार्ग में परवाणू-जाबली, जाबली-डगशाई, डगशाई-बड़ोग, बड़ोग-सोलन, सोलन-करोल टिब्बा, करोल टिब्बा-आइटी सिटी वाकनाघाट, आइटी सिटी वाकनाघाट-शोघी, शोघी-तारादेवी मंदिर और तारादेवी स्टेशन शामिल होंगे।
इस रोपवे के पूरा होने के बाद शिमला आने वाले पर्यटकों को कालका-शिमला हेरिटेज रेललाइन के साथ-साथ पहाड़ी नजारों का एक और अद्भुत अनुभव प्राप्त होगा। यह परियोजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगी।