Summer express, चंडीगढ़ | हरियाणा में हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी में अंतर्कलह बढ़ गया है। चुनाव में पांच विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग और चार विधायकों के वोट रद्द होने के बाद पार्टी में गुटबाजी साफ नजर आने लगी है। इस दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जिन विधायकों के कारण कांग्रेस के वोट प्रभावित हुए, उन पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।
चुनाव में कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्हें पार्टी के 37 विधायकों में से केवल 28 का समर्थन मिला। पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की और चार वोट रद्द हो गए। इससे नौ वोट प्रभावित हुए, जिसने कांग्रेस की जीत मुश्किल से सुनिश्चित की।
इस पूरे घटनाक्रम में गुटबाजी भी उभर कर सामने आई। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा का सिलसिला जारी है। चुनाव से पहले उन्होंने विधायकों को क्रॉस वोटिंग से बचने की नसीहत दी थी और चेतावनी भी दी थी कि ऐसा होने पर उन विधायकों की सियासी भविष्य को जोखिम होगा।
हरियाणा भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने दावा किया कि निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के संपर्क में 12 कांग्रेस विधायक थे। कांग्रेस के नौ प्रभावित वोटों ने इस दावे की पुष्टि करती प्रतीत होती है।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यदि गुटबाजी इसी तरह जारी रही तो राहुल गांधी बृजेंद्र सिंह को पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाने पर विचार कर सकते हैं। फिलहाल, कांग्रेस के भीतर हुड्डा और सैलजा गुटों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और मतभेद जारी हैं।
इस स्थिति ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्यसभा चुनाव के परिणामों ने हरियाणा कांग्रेस में सियासी असंतुलन और नेतृत्व के भविष्य को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।