Summer Express, बिजनौर | उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की शुरुआती जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस युवक को बिजनौर पुलिस ने कुछ महीने पहले हथियार दिखाने के मामले में निर्दोष मानते हुए क्लीन चिट दी थी, अब उसी के खिलाफ ATS की जांच में आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। इस खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।
मामला नवंबर 2025 का है, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो कॉल का क्लिप वायरल हुआ था। वीडियो में बिजनौर के नांगल क्षेत्र का निवासी मैजुल और मेरठ निवासी, जो वर्तमान में दुबई में रह रहा है, आकिब खान बातचीत करते नजर आए थे। वीडियो में आकिब के पास AK-47 राइफल और हैंड ग्रेनेड जैसे हथियार स्पष्ट रूप से दिखाई दिए थे। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया, लेकिन जांच में गंभीरता नहीं दिखाई गई।
तत्कालीन जांच अधिकारी ने आरोपी के बयान को ही आधार मानते हुए मामले को निपटा दिया। आकिब ने दावा किया था कि वीडियो में दिख रही AK-47 असल में खिलौना है और हैंड ग्रेनेड एक परफ्यूम की बोतल है। हैरानी की बात यह रही कि बिना किसी फॉरेंसिक जांच या तकनीकी सत्यापन के पुलिस ने इस दावे को स्वीकार कर लिया और दोनों आरोपियों को क्लीन चिट देकर केस बंद कर दिया।
हालांकि, अप्रैल 2026 में यूपी ATS ने मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामलों में छापेमारी की, जिसमें आकिब खान का नाम सामने आया। ATS की जांच में यह सामने आया कि आकिब दुबई से बैठकर एक सक्रिय आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है और भारत में संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहा था।
इस खुलासे ने बिजनौर पुलिस की पिछली जांच की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले के उजागर होते ही पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन थानाध्यक्ष सत्येंद्र मालिक को निलंबित कर दिया है। साथ ही नजीबाबाद के क्षेत्राधिकारी नितेश प्रताप सिंह को भी उनके पद से हटा दिया गया है।
इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है और पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।