Summer express, हिसार | हिसार और पानीपत सहित हरियाणा की विभिन्न अनाज मंडियों में गेहूं की आवक तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अधिक नमी के कारण सरकारी खरीद प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। कई जिलों में निर्धारित मानकों के अनुरूप नमी न होने से खरीद एजेंसियां फिलहाल गेहूं खरीदने से हिचक रही हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश की मंडियों में गेहूं की आवक लगातार बढ़ रही है, लेकिन नमी का स्तर तय सीमा 12 प्रतिशत से अधिक बना हुआ है। इसी कारण कई जगहों पर अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू नहीं हो पाई है। पानीपत और यमुनानगर को छोड़कर हांसी, हिसार, कैथल और फतेहाबाद जैसे जिलों में गेहूं की सरकारी खरीद अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
पानीपत मंडी में रविवार को करीब 650 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई, जबकि अब तक कुल 6,694 क्विंटल गेहूं MSP पर खरीदा जा चुका है। वहीं जिले में सरसों की खरीद भी दर्ज की गई है। दूसरी ओर, फतेहाबाद जिले की मंडियों में करीब 5,000 क्विंटल गेहूं पहुंच चुका है, लेकिन खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
हिसार अनाज मंडी में भी गेहूं की आवक तो हुई, लेकिन नमी अधिक होने के चलते खरीद नहीं हो सकी। शनिवार को 366 क्विंटल गेहूं की आवक दर्ज की गई थी, मगर उसे भी खरीदा नहीं जा सका। वहीं मंडी में सरसों की आवक जारी है।
हांसी मंडी में स्थिति और भी स्पष्ट है, जहां अब तक करीब 37,000 क्विंटल गेहूं की आवक और 550 गेट पास जारी होने के बावजूद नमी 16-17 प्रतिशत होने के कारण एक भी ढेरी की खरीद नहीं हो पाई है।
अधिकारियों के अनुसार, 12 प्रतिशत तक नमी वाले गेहूं की ही खरीद की जा रही है। रविवार को प्रदेशभर में विभिन्न खरीद एजेंसियों द्वारा कुल 1,091.8 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई, जिसमें हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन प्रमुख रूप से शामिल रहीं।
यमुनानगर में गेहूं की आवक बढ़ने के बावजूद खरीद न होने से फसल मंडियों से सड़कों तक फैल गई है, जहां किसान गेहूं को सुखाकर नमी कम करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं रोहतक में आढ़तियों की हड़ताल के चलते आवक प्रभावित रही।
कुल मिलाकर, मंडियों में गेहूं की पर्याप्त आवक के बावजूद नमी की समस्या के कारण सरकारी खरीद प्रक्रिया सुस्त पड़ी हुई है, जिससे किसानों को अपनी फसल के निपटान में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।