Summer express, फतेहाबाद | जिले में अवैध कॉमर्शियल कॉलोनी की जमीन की कथित फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आया है, जिससे सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। यह पूरा मामला तहसील कार्यालय में नियमों की अनदेखी और मिलीभगत की आशंका को दर्शाता है।
जानकारी के अनुसार, मिनी बाईपास के पास बीघड़ रोड स्थित एक अवैध कॉमर्शियल कॉलोनी की जमीन को कृषि योग्य दिखाकर कम कीमत पर रजिस्ट्री कर दी गई। इस प्रक्रिया में फर्जी प्रॉपर्टी आईडी का उपयोग किया गया और जिला नगर योजनाकार (DTP) की अनिवार्य एनओसी भी नहीं ली गई।
प्रारंभिक जांच में करीब 12 लाख रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान का खुलासा हुआ है। शिकायत मिलने के बाद डीसी डॉ. विवेक भारती ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित रजिस्ट्रियों पर नायब तहसीलदार विकास कुमार के हस्ताक्षरों पर रोक लगा दी है। इसी बीच विकास कुमार अवकाश पर चले गए हैं।
जांच में सामने आया है कि नगर परिषद में दर्ज यह जमीन कॉमर्शियल श्रेणी की थी, जिसके लिए रजिस्ट्री से पहले DTP की मंजूरी जरूरी थी। आरोप है कि खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों ने नगर परिषद कर्मियों और नायब तहसीलदार की कथित मिलीभगत से फर्जी कृषि प्रॉपर्टी आईडी तैयार कर नियमों को दरकिनार किया।
25 मार्च 2026 को दर्ज तीन रजिस्ट्रियों (7648, 7649 और 7650) में भारी गड़बड़ी सामने आई है। दो रजिस्ट्रियों में 222-222 वर्ग गज के प्लॉट करीब 50 लाख रुपये में बेचे गए, जबकि कलेक्टर रेट इससे कहीं अधिक था, जिससे स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस में बड़ा नुकसान हुआ।
वहीं, एक अन्य रजिस्ट्री में करीब 28 मरला जमीन 50 लाख रुपये से कम में दर्ज की गई, जबकि इसकी वास्तविक कीमत ढाई करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इस एक सौदे में ही करीब 9.5 लाख रुपये स्टांप शुल्क और 20 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस का नुकसान हुआ।
प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और डीसी स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक कोई भी अधिकारी इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आया है।