Summer express/ ऊना ,राकेश -:हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में इस साल आलू की खेती किसानों के लिए फायदे के बजाय नुकसान का सौदा बनती जा रही है। भरपूर उत्पादन होने के बावजूद मंडियों में बेहद कम कीमत मिलने से किसान आर्थिक दबाव में हैं। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि किसान अब अपनी उपज सीधे ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए खुद बाजार में उतरने को मजबूर हैं।
रविवार को चिंतपूर्णी बाजार में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जब स्थानीय किसान बलबीर सैनी अपनी निजी कार में आलू भरकर बेचने पहुंचे। यह दृश्य लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया। सैनी ने बताया कि उन्होंने करीब 50 कनाल जमीन पर आलू की खेती की थी, जिसमें बीज, खाद और मेहनत समेत लगभग 3 लाख रुपये खर्च हुए। लेकिन मंडी में उन्हें केवल 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है, जो लागत के मुकाबले बेहद कम है।उन्होंने कहा कि बिचौलियों को सस्ते दाम पर फसल बेचने के बजाय उन्होंने खुद ग्राहकों तक पहुँचने का फैसला किया, ताकि कम से कम कुछ नुकसान की भरपाई हो सके। सैनी ने सब्जियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) जैसी किसी ठोस नीति की कमी पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि अनाज की तरह सब्जियों के लिए कीमत तय न होने से किसान हर साल जोखिम उठाने को मजबूर रहता है।हालांकि बाजार में गाड़ी लगाकर बिक्री करने पर उन्हें कुछ दुकानदारों के विरोध का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने प्रशासन से संपर्क किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि वे किसी के व्यापार में बाधा नहीं डालते, तो उन्हें बिक्री से रोका नहीं जा सकता।इस घटना ने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा, जो किसान की स्थिति पर सहानुभूति जताते नजर आए।