Summer express, कुरुक्षेत्र | कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में हाल के महीनों में हुई छात्र-छात्राओं की आत्महत्याओं के मामले में नया मोड़ सामने आया है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने जांच के दौरान चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके अनुसार, संस्थान के कई विद्यार्थी सट्टेबाजी और भारी ब्याज वाले कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं, जो उनकी मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाल रहा है।
रेणु भाटिया एनआईटी परिसर पहुंचीं और करीब साढ़े चार घंटे तक संस्थान प्रशासन के साथ मैराथन बैठक की। इस दौरान उन्होंने बताया कि छात्रों पर क्रेडिट कार्ड के जरिए 70-70 हजार रुपये तक का कर्ज है, जिस पर करीब 36 प्रतिशत तक ब्याज लिया जा रहा है। इस कर्ज को चुकाने के लिए छात्र और कर्ज लेने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे वे आर्थिक और मानसिक दबाव में आ रहे हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि एक निजी व्यक्ति, जो क्रेडिट कार्ड बनवाने का काम करता था, वह संस्थान के करीब 3500 छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा हुआ था और बिना अभिभावकों की अनुमति के छात्रों के क्रेडिट कार्ड बनवाए जा रहे थे। इस पर संदेह जताते हुए भाटिया ने इसे संभावित साजिश बताया और पुलिस को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
एनआईटी के कार्यवाहक निदेशक ब्रह्मजीत सिंह ने बताया कि 9 अप्रैल को एक छात्र की आत्महत्या के बाद ही बैंक को पत्र लिखकर परिसर में क्रेडिट कार्ड बनाने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। अन्य बैंकों और कंपनियों को भी इसी तरह की गतिविधियों से दूर रहने को कहा गया है।
गौरतलब है कि 16 फरवरी से 16 अप्रैल के बीच एक छात्रा समेत चार छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी, जबकि एक छात्रा ने आत्महत्या का प्रयास किया था। इससे पहले भी एक छात्र के परिजनों ने उस पर कर्ज होने और सट्टेबाजी में फंसने की बात कही थी। लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद संस्थान में अनिश्चितकालीन अवकाश घोषित कर दिया गया है।
रेणु भाटिया ने आत्महत्या के सभी मामलों का विस्तृत ब्यौरा मांगा है और पीड़ित छात्रों के परिजनों से सीधे बातचीत करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि छात्र-छात्राएं इस तरह के दबाव में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। आत्महत्या का प्रयास करने वाली छात्रा अभी मानसिक आघात में है और आयोग उसके स्वस्थ होने के बाद उससे भी बातचीत करेगा।
इस पूरे मामले ने शिक्षा संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और वित्तीय शोषण जैसे गंभीर मुद्दों को फिर से उजागर कर दिया है। अब सभी की नजरें जांच के निष्कर्ष और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।