Summer express, अंकुर कपूर,अंबाला। जिले में लगातार गिरते लिंगानुपात को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता अभियान को और व्यापक बनाने का निर्णय लिया है। अब अंबाला में आयोजित होने वाले विवाह समारोहों, सरकारी कार्यक्रमों और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से जुड़े संदेश और स्लोगन प्रसारित किए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव लाकर बेटियों के प्रति सम्मान और समानता की भावना को मजबूत करना है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी और सामाजिक प्रगति के बावजूद समाज के कुछ वर्गों में आज भी बेटियों को लेकर भेदभावपूर्ण सोच बनी हुई है। यही मानसिकता लिंगानुपात में गिरावट का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। हाल ही में जिले के लिंगानुपात के आंकड़ों में आई कमी के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता गतिविधियों को तेज करने का फैसला लिया है।
नई पहल के तहत विशेष रूप से विवाह समारोहों को अभियान से जोड़ा जा रहा है। विभाग का मानना है कि शादी जैसे सामाजिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और ऐसे मंचों के माध्यम से बेटा-बेटी समानता का संदेश अधिक प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचाया जा सकता है। नवविवाहित दंपत्तियों को भी परिवार की नई शुरुआत से ही बेटियों के सम्मान और समान अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
अंबाला की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रेनू पजनी ने बताया कि जिले में घटते लिंगानुपात को सुधारने और लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के संदेश प्रसारित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक सकारात्मक संदेश पहुंचाना और समाज में बेटियों के प्रति सम्मानजनक सोच को बढ़ावा देना है।
स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि सामुदायिक भागीदारी और निरंतर जागरूकता अभियानों के माध्यम से लिंगानुपात में सुधार लाने के साथ-साथ बेटियों को समान अवसर देने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।