Summer express/शिमला, संजू -:हिमाचल प्रदेश में इन दिनों जहां ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिल रहा है वहीं इस वर्ष मानसून का रुख कुछ धीमा रह सकता है, जिससे आम जनता को सामान्य से कम बारिश का सामना करना पड़ सकता है वहीं किसान बागवानों की चिंताएं बढ़ सकती है।मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक प्रतिवर्ष की अपेक्षा इस साल मानसून के बादलों को कम बरसने की संभावना है।वहीं आगामी दिनों में राज्य के मध्य और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अगले पांच दिनों तक लगातार बादल छाए रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर रुक-रुक कर हल्के स्तर की बारिश हो सकती है। 18 और 19 जून को कुछ जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार ने आगामी दिनों के लिए पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया कि इस साल राज्य में मानसून कमजोर रहने की संभावना है, जिससे कुल बारिश सामान्य से 10% या उससे भी कम दर्ज की जा सकती है।उनजोने कहा कि आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में मानसून के दौरान औसतन 730 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार इसके घटकर लगभग 670 मिलीमीटर या उससे कम रहने का अनुमान है।निदेशक शोभित कटियार ने बताया कि मानसून को प्रभावित करने वाले वैश्विक पैरामीटर्स (Global Parameters) इस बार अनुकूल नहीं हैं, जिसके कारण बारिश में कमी आएगी।वहीं प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Nino) की स्थितियां विकसित हो चुकी हैं, जो आने वाले महीनों में और मजबूत होंगी। अल नीनो के कारण वर्ष में देश और प्रदेश दोनों जगह बारिश कम होती है।इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अल नीनो के साथ ही हिंद महासागर में दबाव की स्थिति यानी इंडियन ओशन डायपोल फिलहाल ‘न्यूट्रल’ (सामान्य) बना हुआ है। इसके पॉजिटिव होने पर अच्छी बारिश होती है, लेकिन इस बार इसके न्यूट्रल रहने से मानसून को कोई अतिरिक्त बल नहीं मिल रहा है। यूरेशियन क्षेत्र में बर्फ की चादर की स्थिति भी इस बार मानसून के अनुकूल नहीं पाई गई है।हिमाचल में मानसून पहुंचने की सामान्य तिथि 20 से 25 जून के बीच होती है। इस साल मानसून अपनी सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है और अब तक देश के दक्षिणी प्रायद्वीप, पूर्वोत्तर राज्यों तथा पूर्वी भारत के हिस्सों को कवर कर चुका है। मानसून जैसे ही उत्तर-पश्चिम भारत में प्रवेश करेगा, उसके बाद हम हिमाचल में इसके पहुंचने की स्पष्ट हो पाएगी।कमजोर मानसून के चलते राहत की बात यह है कि ‘क्लाउड बर्स्ट’ और अत्यधिक भारी बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाएं तुलनात्मक रूप से काफी सीमित रहेंगी, जिससे बड़ी आपदाओं का खतरा कम होगा।
इसके साथ ही मौसम निदेशक ने बताया कि जून की शुरुआत में हुई बारिश के कारण प्रदेश में तापमान सामान्य से 6 से 8 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया था। लेकिन 14 जून से बारिश थमने के बाद तापमान में अचानक 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे पारा अब सामान्य स्तर पर पहुंच गया है।आने वाले दो से तीन दिनों में प्रदेश के निचले मैदानी इलाकों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस और बढ़ सकता है। हालांकि, पहाड़ी इलाकों के तापमान में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि तापमान में बढ़ोतरी के बावजूद फिलहाल प्रदेश में ‘हीट वेव’ जैसी स्थिति बनने की संभावना बेहद कम है
शोभित कटियार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में आगामी दिनों में मौसम का मिला-जुला रुख देखने को मिलेगा। राज्य के मध्य और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अगले पांच दिनों तक लगातार बादल छाए रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर रुक-रुक कर हल्के स्तर की बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग ने 18 और 19 जून को विशेष रूप से कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। इस अवधि में इन जिलों में गरज-चमक के साथ अंधड़ चलने और बिजली गिरने की आशंका है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है। हालांकि, अन्य दिनों में प्रदेश में मौसम को लेकर कोई बड़ा या गंभीर संकट नहीं देखा जाएगा।वहीं उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में इस बार सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इसमें राज्य के निचले मैदानी इलाके, मध्यवर्ती क्षेत्र और किन्नौर जिला शामिल हैं।हालांकि, कुछ क्षेत्रों के लिए राहत की खबर है। विभाग के अनुसार, लाहौल-स्पीति, चम्बा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों, कुल्लू और कुल्लू से सटे मंडी जिले के कुछ हिस्सों में इस दौरान सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है।