समर न्यूज | जालंधर
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच छेहरटा (अमृतसर) और वाराणसी के बीच शुरू हुई ‘संत रविदास एक्सप्रेस’ राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जालंधर कैंट से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।
यह सेवा पंजाब और उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख धार्मिक केंद्रों को सीधे जोड़ती है और खास तौर पर गुरु रविदास के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रेलवे बोर्ड से मंजूर यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलेगी। ट्रेन का संचालन छेहरटा से बुधवार, शुक्रवार और रविवार तथा वाराणसी से गुरुवार, शनिवार और सोमवार को होगा। करीब 1,139 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन लगभग 22 घंटे में तय करेगी। इसके मार्ग में अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, अंबाला कैंट, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ और जौनपुर समेत कई प्रमुख स्टेशन शामिल हैं।
पंजाब में अनुसूचित जाति की आबादी करीब 32 प्रतिशत है, जो देश के राज्यों में सबसे अधिक हिस्सेदारी में से एक है। दोआबा क्षेत्र में रविदासिया समुदाय का विशेष प्रभाव माना जाता है। ऐसे में नई ट्रेन को केवल परिवहन सुविधा के बजाय व्यापक सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भाजपा के लिए पंजाब में 2027 का विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण है और पार्टी लंबे समय से राज्य में अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, ट्रेन की शुरुआत को सीधे चुनावी कदम के रूप में देखना राजनीतिक व्याख्या है। आधिकारिक तौर पर इसका प्रमुख उद्देश्य धार्मिक यात्रियों और आम यात्रियों के लिए पंजाब-उत्तर प्रदेश के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। ट्रेन से धार्मिक पर्यटन, कारोबार और दोनों राज्यों के बीच नियमित यात्रियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
नाम और रूट को लेकर बदलाव: शुरुआत में ट्रेन को ‘संत रविदास एक्सप्रेस’ नाम से प्रचारित किया गया था। बाद में इसके नाम में बदलाव की जानकारी सामने आई और इसे ‘सीर गोवर्धनपुर वाराणसी एक्सप्रेस’ के नाम से भी संदर्भित किया गया। ट्रेन का मूल रूट छेहरटा-अमृतसर से वाराणसी के बीच है, इसलिए इसे केवल ‘वाराणसी-जालंधर’ ट्रेन कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। जालंधर कैंट से इसका उद्घाटन किया गया था।