Summer express, चंडीगढ़। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की सीमाओं में बड़े बदलाव की तैयारी के बीच हरियाणा के कई जिलों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। दिल्ली में आयोजित एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में एनसीआर क्षेत्र को सीमित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। प्रस्ताव के अनुसार, दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के दायरे तक ही एनसीआर को सीमित किया जा सकता है। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री एवं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की।
यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो हरियाणा का वर्तमान 25,327 वर्ग किलोमीटर एनसीआर क्षेत्र घटकर लगभग 10,546 वर्ग किलोमीटर रह जाएगा। इससे राज्य के करीब 60 प्रतिशत एनसीआर क्षेत्र के बाहर होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रस्तावित बदलाव का सबसे अधिक असर महेंद्रगढ़ और जींद जिलों पर पड़ सकता है। महेंद्रगढ़ का बड़ा हिस्सा 100 किलोमीटर की सीमा से बाहर होने के कारण एनसीआर से बाहर हो सकता है, जबकि जींद भी इस नई सीमा रेखा से प्रभावित होगा। वहीं करनाल और पानीपत को राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के कारण आंशिक राहत मिलने की संभावना है, हालांकि पूरे जिले का एनसीआर में बने रहना मुश्किल माना जा रहा है। इसी तरह भिवानी और चरखी दादरी पर भी असर पड़ सकता है।
हरियाणा सरकार ने एनसीआर से बाहर होने वाले क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और विकास को बनाए रखने के लिए एक वैकल्पिक प्रस्ताव भी रखा है। इसके तहत राज्य के 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़ा कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई गई है। सरकार का मानना है कि इससे औद्योगिक गतिविधियों, निवेश और आधारभूत ढांचा विकास को गति मिलती रहेगी।
दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद वर्ष 2015 में मनोहर लाल खट्टर ने करनाल और जींद को एनसीआर में शामिल किए जाने को बड़ी उपलब्धि बताया था। उस समय हरियाणा का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा एनसीआर के दायरे में आ गया था। हालांकि वर्ष 2021 में उन्होंने यह तर्क दिया कि दिल्ली से अधिक दूरी वाले जिलों को एनसीआर के प्रतिबंध तो झेलने पड़ते हैं, लेकिन विकास संबंधी लाभ अपेक्षित स्तर पर नहीं मिल पाते।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कुछ जिले एनसीआर से बाहर होते हैं तो राज्य सरकार को इन क्षेत्रों के लिए अलग औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास नीति तैयार करनी होगी। इससे निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर संभावित नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकेगा। फिलहाल एनसीआर की नई सीमा को लेकर सभी की नजरें बोर्ड के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।