Summer express, सुंदर कुंडू , पलवल I पलवल में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पुराना कोर्ट परिसर स्थित कृषि कार्यालय में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, उसके लाभों और पर्यावरण संरक्षण में उसकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. बाबू लाल सहित विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना की जाने वाली खेती है, जिसमें मिट्टी, पानी, सूर्य की रोशनी और स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर फसलों का उत्पादन किया जाता है। इससे खेती की लागत कम होती है, किसानों की आत्मनिर्भरता बढ़ती है और उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ उपलब्ध होते हैं। साथ ही रासायनिक पदार्थों के दुष्प्रभाव से पर्यावरण को भी बचाया जा सकता है।
ब्लॉक सहायक तकनीकी प्रबंधक सुंदरलाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती का उद्देश्य खेती को अधिक टिकाऊ और व्यावहारिक बनाना है। इस पद्धति से मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है, कार्बन तत्वों की मात्रा बढ़ती है और जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ किसानों की उत्पादन लागत घटाकर उनकी आय बढ़ाने में भी सहायक साबित हो रही है।
शिविर में मौजूद किसानों ने भी प्राकृतिक खेती के अपने अनुभव साझा किए। किसानों ने बताया कि बीजामृत, जीवामृत और घनजीवामृत जैसी पारंपरिक तकनीकों के उपयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होता है और फसलों में रोगों का खतरा कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल बेहतर उत्पादन देती है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
कृषि विभाग ने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने और इसके माध्यम से टिकाऊ कृषि व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया। विभाग का मानना है कि प्राकृतिक खेती भविष्य में खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।