Summer express, करनाल। जिला नागरिक अस्पताल के कैदी वार्ड से फरार हुए कुख्यात बदमाश गुरजीत सिंह को पुलिस की सीआईए टीम ने करीब 20 दिन बाद दोबारा गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को अंबाला से पकड़ने में सफलता हासिल की। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है और अब फरारी के दौरान उसे शरण देने वाले लोगों व मददगारों की पहचान के लिए जांच तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, गुरजीत सिंह को 25 मई को मेरठ रोड स्थित आवर्धन नहर के पास पुलिस मुठभेड़ के दौरान गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया गया था। घायल अवस्था में उसे उपचार के लिए जिला नागरिक अस्पताल के कैदी वार्ड में भर्ती कराया गया था। हालांकि, 28 मई की रात वह पुलिस सुरक्षा को धता बताते हुए अस्पताल से फरार हो गया था।
चार पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुआ था फरार
पुलिस ने आरोपी की सुरक्षा के लिए चार पुलिसकर्मियों को तैनात किया था, लेकिन इसके बावजूद वह देर रात कैदी वार्ड से भाग निकलने में सफल रहा। जब ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने वार्ड की जांच की तो आरोपी वहां नहीं मिला और केवल उसकी हथकड़ी बरामद हुई। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया गया था।
कई राज्यों में वांछित है गुरजीत सिंह
पुलिस के अनुसार पंजाब के खरड़ निवासी गुरजीत सिंह पर लूट, फायरिंग और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों के कई केस दर्ज हैं। वह हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों की पुलिस के लिए वांछित अपराधी रहा है। तरावड़ी पेट्रोल पंप पर लूट और फायरिंग की वारदात के बाद पुलिस उसकी लगातार तलाश कर रही थी।
पेट्रोल पंप लूटकांड में आया था नाम
पुलिस जांच में सामने आया था कि 2 मई की तड़के गुरजीत सिंह बिना नंबर प्लेट की बाइक पर तरावड़ी स्थित चौधरी पेट्रोल पंप पहुंचा था। पेट्रोल भरवाने के बाद उसने पिस्तौल के बल पर कैश लूटने का प्रयास किया। विरोध करने पर उसने फायरिंग भी की, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई थी, जिसके आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची थी।
फरारी के नेटवर्क की होगी जांच
अस्पताल से फरार होने के बाद सीआईए टीम लगातार विभिन्न स्थानों पर दबिश दे रही थी। मुखबिर तंत्र और तकनीकी निगरानी की मदद से आखिरकार आरोपी को अंबाला से गिरफ्तार कर लिया गया। अब पुलिस उससे पूछताछ कर यह पता लगाएगी कि फरारी के दौरान वह किन-किन ठिकानों पर रहा, किसने उसकी मदद की और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अस्पताल से फरार होने की साजिश में किसी अंदरूनी व्यक्ति या सहयोगी की भूमिका तो नहीं थी। मामले में किसी की संलिप्तता सामने आने पर उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।