Summer express, कैनानास्किस (कनाडा)। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी7 ने महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की आपूर्ति को लेकर चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में अहम पहल की है। समूह के नेताओं ने क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
जी7 देशों ने रणनीतिक खनिजों के भंडारण, आपूर्ति प्रबंधन और संकट के समय समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक नए सहयोगी ढांचे पर काम करने का फैसला किया है। इस पहल में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जो बाजार की निगरानी, जोखिमों की पहचान और समय रहते चेतावनी देने में सहयोग करेगी।
लिथियम और निकेल पर रहेगा शुरुआती फोकस
संयुक्त बयान में जी7 नेताओं ने कहा कि शुरुआत में लिथियम और निकेल जैसे प्रमुख खनिजों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन खनिजों का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, रक्षा उपकरणों, अत्याधुनिक तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
नेताओं ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखते हुए आपूर्ति जोखिमों को कम करना है, ताकि उद्योगों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
चीन की भूमिका को लेकर बढ़ी चिंता
पश्चिमी देश लंबे समय से ऐसे खनिजों की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाश रहे हैं, जिन पर चीन का मजबूत नियंत्रण है। पिछले वर्ष चीन द्वारा परमानेंट मैग्नेट के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद कई औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ था। इस घटना ने वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरियों और एक ही देश पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को उजागर कर दिया था।
संकट प्रबंधन के लिए बनेगा नया मंच
जी7 देशों ने नीति समन्वय, डेटा साझाकरण और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए एक विशेष मंच स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। यह मंच IEA के साथ मिलकर बाजार में संभावित व्यवधानों की निगरानी करेगा और समय रहते चेतावनी जारी करने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को अधिक सुरक्षित, विविधतापूर्ण और स्थिर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।