Summer express, अमृतसर। जलियांवाला बाग मेमोरियल सिविल अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की कमी अब स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। 200 बिस्तरों वाले इस जिला स्तरीय अस्पताल में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच पर्याप्त नर्सिंग कर्मियों का अभाव उपचार व्यवस्था पर असर डाल रहा है।
जानकारी के मुताबिक अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के 94 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से करीब 19 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं। वर्तमान में केवल 75 नर्सें ही सेवाएं दे रही हैं, जिससे उपलब्ध स्टाफ पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है। हालात तब और जटिल हो गए जब करीब 10 नर्सों को डेपुटेशन पर अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में भेज दिया गया। इसके चलते अस्पताल में ड्यूटी प्रबंधन प्रभावित हो रहा है और कई नर्सों को एक साथ कई वार्डों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
आपातकालीन और आईसीयू सेवाओं पर दबाव
स्टाफ की कमी का सबसे ज्यादा असर अस्पताल के संवेदनशील विभागों जैसे इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू और नवजात शिशु देखभाल इकाई पर पड़ रहा है। इन विभागों में प्रशिक्षित और अनुभवी नर्सिंग स्टाफ की विशेष आवश्यकता होती है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण मरीजों को समय पर और बेहतर देखभाल उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण बन गया है।
मरीजों और परिजनों की बढ़ी चिंता
अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सीमित स्टाफ के कारण कई बार उपचार और देखभाल में देरी होती है। एक नर्स पर अधिक मरीजों की जिम्मेदारी होने से व्यक्तिगत निगरानी और सेवा प्रभावित हो रही है।
सरकार से तत्काल भर्ती की मांग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने पंजाब सरकार और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर रिक्त पदों को जल्द भरने और डेपुटेशन नीति की समीक्षा करने की मांग की है। प्रशासन का मानना है कि पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी और अस्पताल की कार्यप्रणाली भी सुचारु रूप से चल सकेगी।