चंडीगढ़, मोनिका रावत | चंडीगढ़ में शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर ज्वॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स, यूटी चंडीगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा निदेशक और वित्त सचिव से मुलाकात की। बैठक के दौरान महंगाई भत्ता (डीए), डीए एरियर और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
यूनियन ने शिक्षा निदेशक के समक्ष शिकायत रखी कि कई सरकारी स्कूलों में गेस्ट और कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों के पुराने डीए एरियर का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। कुछ शिक्षकों का वर्ष 2021 से एरियर लंबित है। यूनियन के अनुसार करीब 10 स्कूलों में प्रशासनिक लापरवाही के कारण शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल शिक्षा निदेशक ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने एक अधिकारी को नियुक्त कर संबंधित स्कूलों से जवाब तलब करने और लंबित एरियर भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
हालांकि गेस्ट और कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों को डीए देने का मुद्दा अभी भी अधर में लटका हुआ है। वित्त सचिव के साथ हुई बैठक में उन्होंने मौजूदा व्यवस्था के तहत डीए जारी करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि अब तक गेस्ट और कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों को डीए गलत तरीके से दिया जा रहा था और इसके लिए नई नीति बनाए जाने की आवश्यकता है।
वित्त सचिव के इस रुख पर शिक्षक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई। यूनियन नेताओं का कहना है कि गेस्ट और कॉन्ट्रैक्ट शिक्षक वर्षों से नियमित स्वीकृत पदों पर कार्यरत हैं और उन्हें पूर्व से लागू नियमों, विभागीय निर्णयों तथा न्यायालय के आदेशों के अनुसार डीए मिलता रहा है। ऐसे में यह लाभ रोकना कर्मचारियों के अधिकारों का हनन है।
यूनियन ने आरोप लगाया कि गेस्ट शिक्षकों का डीए रोकना न्यायालय के आदेशों की अवमानना के समान है, क्योंकि इस मामले में शिक्षकों को कोर्ट से राहत मिल चुकी है। साथ ही नियमित शिक्षकों की 2022 से पहले की हाफ-पे लीव से जुड़ी फाइल भी कई महीनों से वित्त विभाग में लंबित होने पर नाराजगी जताई गई।
बैठक में मौजूद भारतीय मजदूर संघ के अतिरिक्त महामंत्री ने भी वित्त विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लंबित मामलों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो मामले को चंडीगढ़ प्रशासक के समक्ष उठाया जाएगा।
ज्वॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स के प्रधान राणा ने कहा कि जल्द शिक्षकों की बैठक बुलाई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर वित्त विभाग के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन और प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे।