Summer express, अंकुर कपूर, अंबाला। हरियाणा में भीषण गर्मी और बारिश की कमी के बावजूद अंबाला जिले के किसान धान यानी जीरी की फसल की बुवाई में जुट गए हैं। किसानों ने अपने खेतों में धान की रोपाई और बुवाई का कार्य शुरू कर दिया है। मानसून के करीब होने और समय पर फसल तैयार करने की उम्मीद के बीच किसान दिन-रात खेतों में मेहनत कर रहे हैं। हालांकि पानी की कमी इस बार किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है।
आमतौर पर किसान 15 जून के आसपास धान की फसल की बुवाई शुरू कर देते हैं, लेकिन इस बार तेज गर्मी और कम बारिश के कारण किसानों को अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं। कई किसानों ने खेतों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बोर करवाने शुरू कर दिए हैं, ताकि फसल को पर्याप्त सिंचाई मिल सके। किसानों का कहना है कि धान की फसल को अधिक पानी की जरूरत होती है और यदि समय पर पानी नहीं मिला तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
किसानों के मुताबिक फिलहाल खेतों में काम सुचारू रूप से चल रहा है, लेकिन बीच-बीच में बिजली कटौती से परेशानी जरूर होती है। सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और मोटरों पर निर्भर किसानों का कहना है कि लगातार बिजली आपूर्ति जरूरी है, ताकि फसल को समय पर पानी मिल सके।
धान का सीजन शुरू होते ही किसान ट्रैक्टरों के साथ खेतों में जुट गए हैं। खेतों को तैयार करने के बाद रोपाई का काम शुरू किया जा रहा है। इस कार्य में बिहार से आए मजदूर भी किसानों की मदद कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि धान की फसल लगभग तीन महीने में तैयार हो जाती है और इसके लिए लगातार सिंचाई की आवश्यकता होती है।

किसान बलवंत सिंह ने बताया कि टांगरी क्षेत्र के आसपास हाइब्रिड धान की खेती अधिक की जाती है, क्योंकि मंडियों में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। उन्होंने कहा कि मौसम का मिजाज भले ही अनिश्चित बना हुआ है, लेकिन खेतों में लगाए गए बोर और ट्यूबवेल पानी की कमी को काफी हद तक पूरा कर रहे हैं।
वहीं किसान और बोर करवाने वाले बलविंदर सिंह का कहना है कि बारिश कम होने के कारण किसानों को अपने स्तर पर सिंचाई के इंतजाम करने पड़ रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होगा, जिससे धान की फसल को और फायदा मिलेगा।