Summer express/शिमला,संजू -:केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित ग्राम जी’ करने और नए प्रावधान लागू करने पर हिमाचल सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि केंद्र ने बिना किसी राज्य से राय लिए एकतरफा फैसला थोप दिया है। पहले मनरेगा में 100% खर्च केंद्र उठाता था, अब इसे 90:10 कर दिया गया है। इससे हिमाचल पर हर साल 164.63 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। मजदूरी भी 320 रुपये से घटाकर 247 रुपये कर दी गई है।
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मांग आधारित योजना खत्म कर डिमांड ड्रिवन और सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे पहाड़ी राज्य में काम करना मुश्किल होगा। केंद्र पर मनरेगा स्टाफ का फरवरी से 20 करोड़ बकाया है। मजबूरी में इस एक्ट को अडॉप्ट करना पड़ेगा, वरना राज्य को स्कीम से बाहर कर दिया जाएगा।पहले पूरा खर्च केंद्र देता था। अब हिमाचल जैसे विशेष राज्यों के लिए 90:10 और अन्य राज्यों के लिए 60:40 कर दिया गया। इससे राज्य पर 164.63 करोड़ का एक्स्ट्रा बोझ पड़ेगा। मौजूदा रोजगार पर 12.54 करोड़ सालाना अतिरिक्त खर्च आएगा। केंद्र की अलोकेशन 0.914% है, जिससे 220-230 लाख मैनडेज ही मिलेंगे, जबकि हमने 395 लाख मैनडेज का काम किया है।हिमाचल 320 रुपये दिहाड़ी दे रहा था। केंद्र ने गैर-जनजातीय क्षेत्र की मजदूरी घटाकर 247 रुपये कर दी। पहले टॉप-अप का प्रावधान था, अब उसके लिए केंद्र की अनुमति लेनी पड़ेगी। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार मजदूरी बढ़ाने की बजाय घटाई जा रही।
पहले पंचायत-बीडीसी-जिला परिषद से प्लान पास होता था। अब ‘विकसित ग्राम पंचायत प्लान’ बनाना अनिवार्य है, जिसे पीएम गति शक्ति से जोड़ा जाएगा। केंद्र पर मनरेगा स्टाफ GRS, कंप्यूटर ऑपरेटर, जूनियर अकाउंटेंट का फरवरी से 20 करोड़ बकाया है। मनरेगा गरीब का सहारा है। नए बदलाव से हिमाचल की सालाना देनदारी 800 से 1000 करोड़ तक पहुंच सकती है। ये स्कीम सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मनमोहन सिंह के समय शुरू हुई थी। मजबूरी में इसे अडॉप्ट करना पड़ेगा, नहीं तो हिमाचल को स्कीम से बाहर कर देंगे।