अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा है। अयोध्या पुलिस के समक्ष दर्ज कराए गए बयान में उन्होंने चढ़ावे में कथित हेराफेरी की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की, लेकिन किसी भी वित्तीय अनियमितता या गबन में अपनी भूमिका से साफ इनकार किया। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने सोमवार को चंपत राय से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उन्होंने कहा कि मंदिर के चढ़ावे की सुरक्षा और उसमें किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसकी जिम्मेदारी उनकी थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें जैसे ही कथित हेराफेरी की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल कार्रवाई की और संबंधित लोगों के खिलाफ कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू कराई। उनका कहना है कि चोरी या धन के दुरुपयोग में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रही। पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) इस मामले में लगातार साक्ष्य जुटा रहे हैं। जांच एजेंसियां पहले ही कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी हैं और ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। जांच का दायरा बैंक लेनदेन, चढ़ावे के प्रबंधन और धन के उपयोग तक बढ़ाया गया है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
इस बीच, चंपत राय और ट्रस्ट से जुड़े अन्य पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज कर दी है। विपक्ष जहां पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि दोषी कोई भी हो, निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। उधर, फैजाबाद बार एसोसिएशन ने भी इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया है। एसआईटी आने वाले दिनों में कई अन्य लोगों से पूछताछ कर सकती है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे के निर्णय लिए जाएंगे।