Summer express/धर्मशाला, राहुल-: आम आदमी पार्टी (आप) हिमाचल प्रदेश की कोर कमेटी के सदस्य एवं दून विधानसभा के ऑब्जर्वर अचल छाबड़ा ने धर्मशाला में प्रस्तावित केंद्रीय विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस के निर्माण में हो रही देरी को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों बीत जाने के बावजूद यह महत्वपूर्ण परियोजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी, जिससे क्षेत्र के विकास और युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
अचल छाबड़ा ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय का नॉर्थ कैंपस समय पर बनता तो धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होते। इसके साथ ही स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलता और विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होतीं। उन्होंने कहा कि धर्मशाला लंबे समय से प्रदेश का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र रहा है, जहां कांगड़ा, चंबा और अन्य जिलों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई के लिए आते हैं। ऐसे में इस परियोजना का लंबित रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपनी वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का समय पर निर्वहन करने में विफल रही, जिसके कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। उन्होंने कहा कि मामले में न्यायालय को भी हस्तक्षेप करना पड़ा, जो सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।आप नेता ने कांग्रेस सरकार पर शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम क्षेत्रों की उपेक्षा करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि पिछले चार वर्षों में सरकार इस परियोजना को लेकर कोई ठोस रोडमैप या स्पष्ट जवाब जनता के सामने नहीं रख सकी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब विकास से जुड़े मुद्दों पर जवाब चाहती है और इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।
अचल छाबड़ा ने कहा कि आम आदमी पार्टी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी है। उन्होंने बताया कि संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जा रहा है और केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में चुनावी रणनीति तैयार की गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2027 में पार्टी हिमाचल प्रदेश में एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरेगी।उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी शिक्षा और स्वास्थ्य को अपनी प्राथमिकता बनाकर जनता के बीच जाएगी। उनका दावा था कि दिल्ली और पंजाब में पार्टी सरकारों ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं और हिमाचल में भी इसी मॉडल के आधार पर जनता का विश्वास जीतने का प्रयास किया जाएगा।