Summer express, सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत में अवैध चिट फंड और कमेटियों के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने उच्च अधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने वर्षों तक भरोसा जीतने के बाद मोटे मुनाफे का लालच देकर लाखों रुपये हड़प लिए।
पुलिस को दी शिकायत में ज्ञान नगर निवासी प्रवीण कुमार ने बताया कि मुख्य आरोपी जोगेंद्र उर्फ लीलू उसके ननिहाल गांव का रहने वाला है और दोनों के बीच बचपन से जान-पहचान थी। इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए वर्ष 2016 में जोगेंद्र और उसकी पत्नी सुमन ने उसे कमेटियों यानी अवैध चिट फंड में निवेश करने के लिए तैयार किया। शुरुआत में आरोपियों ने समय पर भुगतान कर विश्वास कायम रखा, जिससे पीड़ित को उनकी नीयत पर कोई शक नहीं हुआ।
शिकायत के अनुसार वर्ष 2023 में जोगेंद्र का मामा जयकिशन भी इस नेटवर्क में शामिल हो गया। इसके बाद आरोपियों ने जुलाई, सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर 2023 में डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की नई कमेटियां शुरू कीं। मुनाफे के झांसे में आकर प्रवीण ने इन कमेटियों में कुल नौ हिस्से खरीद लिए।
पीड़ित का आरोप है कि अक्टूबर 2023 में आरोपियों को पता चला कि उसके पास तीन लाख रुपये की राशि आने वाली है, जिसके बाद उसे ज्यादा लाभ का लालच देकर और निवेश कराया गया। आरोपियों ने इसी तरह कई अन्य लोगों को भी अपने जाल में फंसाकर भारी रकम इकट्ठी की।
प्रवीण ने पुलिस को बैंक ट्रांजैक्शन और नकद लेन-देन से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे हैं। शिकायत के मुताबिक जुलाई 2023 से मई 2024 के बीच उसने करीब 7.95 लाख रुपये कमेटियों में लगाए थे, लेकिन उसे केवल 71 हजार रुपये ही वापस मिले। बाकी रकम आरोपियों ने हड़प ली। मामले में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और नकद भुगतान के कई सबूत भी पुलिस को दिए गए हैं।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि धोखाधड़ी केवल कमेटियों तक सीमित नहीं रही। जनवरी 2020 में आरोपियों ने व्यक्तिगत जरूरत का हवाला देकर उससे तीन लाख रुपये नकद उधार लिए। इसके बाद जून 2023 में नई कार खरीदने के नाम पर फिर से तीन लाख रुपये ले लिए। इन्हीं पैसों से आरोपियों ने बाद में नई क्रेटा कार खरीदी। कार खरीदते समय पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से भी 40 हजार 800 रुपये का भुगतान कराया गया, जो आज तक वापस नहीं किया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सितंबर 2023 में आरोपियों को दिया गया एक लाख रुपये का चेक किसी अन्य खाते में ट्रांसफर कर कैश करा लिया गया। इतना ही नहीं, जून 2024 में आरोपियों ने प्रवीण के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बजाज फाइनेंस से करीब 25 हजार रुपये का मोबाइल फोन फाइनेंस करवा लिया। फोन का इस्तेमाल आरोपी कर रहे हैं, जबकि उसकी ईएमआई अब भी पीड़ित के खाते से कट रही है।
जब प्रवीण ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने कथित तौर पर उसे धमकाना शुरू कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि तीनों आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से बिना लाइसेंस के अवैध चिट फंड चलाकर लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने का काम किया।
मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर कार्यालय में दी गई थी। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद 3 जुलाई 2026 को सिविल लाइन थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस ने BUDS Act-2019 की धारा 3 और 21(3) के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 406 और 506 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।