Summer express/धर्मशाला, राहुल -:हिमाचल प्रदेश के नॉर्थ जोन में खरीफ सीजन के दौरान धान की खेती अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्रदेश के पांच प्रमुख जिलों—कांगड़ा, मंडी, ऊना, हमीरपुर और चंबा—में इस वर्ष लगभग 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जा रही है। अधिकांश इलाकों में किसानों ने धान की रोपाई का कार्य लगभग पूरा कर लिया है, जबकि कुछ स्थानों पर यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। कृषि विभाग का कहना है कि फिलहाल फसल की स्थिति संतोषजनक है और यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल बना रहा तो किसानों को बेहतर उत्पादन मिलने की उम्मीद है।
संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. राहुल कटोच ने बताया कि नॉर्थ जोन में अब तक करीब 90 प्रतिशत धान की रोपाई पूरी हो चुकी है। शेष क्षेत्रों में भी जल्द ही रोपाई का कार्य पूरा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस समय धान की फसल ट्रांसप्लांटिंग और डायरेक्ट सीडिंग के विभिन्न चरणों में है, इसलिए उत्पादन का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि धान की पैदावार कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करती है। मानसून की नियमित वर्षा, तापमान, नमी और अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियां फसल की वृद्धि और उत्पादन को सीधे प्रभावित करती हैं। यदि पूरे सीजन के दौरान मौसम किसानों के पक्ष में रहा तो इस बार धान की फसल बेहतर रहने की उम्मीद है।कृषि विभाग लगातार खेतों की निगरानी कर रहा है और किसानों को समय-समय पर तकनीकी सलाह भी उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग की ओर से किसानों को खेतों में जल प्रबंधन, संतुलित उर्वरकों के उपयोग और कीट एवं रोगों की रोकथाम के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं, ताकि फसल को किसी प्रकार का नुकसान न हो।
डॉ. कटोच ने किसानों से अपील की कि वे मौसम की जानकारी और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही खेती से जुड़े निर्णय लें। उन्होंने कहा कि फिलहाल फसल की स्थिति उत्साहजनक है, लेकिन अंतिम उत्पादन का सही आकलन फसल के परिपक्व होने और कटाई के समय ही किया जा सकेगा। विभाग को उम्मीद है कि यदि मौसम सामान्य रहा तो इस वर्ष धान उत्पादन के अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं।