Summer express, कैथल , बलिंदर | हरियाणा के कैथल जिले में मानसून की दस्तक से पहले नहरों, रजवाहों और ड्रेनों की सफाई को लेकर सिंचाई विभाग के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग का दावा है कि बारिश से पहले सभी जल निकासी मार्गों की व्यापक सफाई कराई जा रही है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट में कई स्थानों पर हालात इसके विपरीत नजर आए। जगह-जगह ड्रेन घास, जलकुंभी, झाड़ियों, पेड़-पौधों की पत्तियों और अन्य कचरे से अटी पड़ी मिलीं, जिससे जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
मौके पर किए गए निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट दिखाई दिया कि कई ड्रेनों की समय पर सफाई नहीं की गई है। यदि भारी बारिश के दौरान इन मार्गों से पानी का प्रवाह बाधित होता है तो जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में पानी मैदानी इलाकों की ओर आता है। ऐसे में नहरों, रजवाहों और ड्रेनों का पूरी तरह साफ होना बेहद आवश्यक है। यदि जल निकासी मार्गों में घास, जलकुंभी या अन्य अवरोध बने रहते हैं तो पानी का बहाव रुक सकता है और दबाव बढ़ने से ड्रेन या नहरों के किनारे टूटने का खतरा पैदा हो सकता है।
ऐसी स्थिति में आसपास के गांवों, कृषि भूमि और खड़ी फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जलभराव से किसानों की मेहनत पर पानी फिरने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन भी प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सामने आई इन कमियों के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि यदि मानसून के चरम दौर में अचानक अधिक बारिश होती है तो प्रशासन संभावित बाढ़ जैसी परिस्थितियों से किस तरह निपटेगा। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि बारिश से पहले जल निकासी व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त किया जाना जरूरी है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति से बचा जा सके।
इस पूरे मामले को लेकर हमारी टीम ने सिंचाई विभाग, कैथल के वरिष्ठ अधिकारी नीरज शर्मा से भी बातचीत की। उन्होंने विभाग की ओर से सफाई अभियान जारी होने की बात कही और आश्वासन दिया कि जहां भी कमियां सामने आई हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। विभाग का कहना है कि मानसून के दौरान जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।