अमरावती।आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में 13वीं शताब्दी का एक दुर्लभ शिलालेख मिलने से इतिहासकारों और पुरातत्वविदों में उत्साह है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की एपिग्राफी शाखा द्वारा नल्लमाला टाइगर रिजर्व क्षेत्र में किए गए सर्वेक्षण के दौरान यह शिलालेख येर्रागोंडापालेम मंडल के अय्याम्भोलापल्ले गांव के निकट मिला।
विशेषज्ञों के अनुसार यह शिलालेख काकतीय साम्राज्य की प्रसिद्ध शासक रुद्रमादेवी के काल से संबंधित है और क्षेत्र में बौद्ध धर्म की निरंतर उपस्थिति के महत्वपूर्ण प्रमाण प्रस्तुत करता है।
शिलालेख एक पत्थर की पट्टिका पर उत्कीर्ण है, जिस पर स्तूप और ‘मुचालिंदा नाग’ की आकृतियां भी बनी हुई हैं। प्रारंभिक अध्ययन से पता चला है कि यह अभिलेख वर्ष 1285 ईस्वी का है और इसमें एक गांव के दान का उल्लेख किया गया है। अभिलेख में बताया गया है कि स्थानीय नायक बोलनाय मल्लिकार्जुन नायक ने धार्मिक अनुष्ठानों और बौद्ध धर्म से जुड़े कार्यों के लिए भूमि दान की थी। यह दान रुद्रमादेवी तथा स्वयं दाता के पुण्य के उद्देश्य से किया गया था।
विस्तृत अध्ययन किया जा रहा: इतिहासकारों का मानना है कि यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि अमरावती क्षेत्र और कृष्णा नदी घाटी में बौद्ध परंपरा 13वीं शताब्दी तक सक्रिय रही। अब तक माना जाता था कि इस क्षेत्र में बौद्ध प्रभाव अपेक्षाकृत पहले कमजोर पड़ गया था, लेकिन नए शिलालेख ने इस धारणा पर पुनर्विचार की संभावना पैदा कर दी है। एएसआई अधिकारियों के अनुसार नल्लमाला क्षेत्र में हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण अभिलेख मिले हैं।
इन खोजों से दक्षिण भारत के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने में नई मदद मिल रही है। विशेषज्ञ अब शिलालेख का विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं ताकि उस समय की प्रशासनिक व्यवस्था, धार्मिक गतिविधियों और स्थानीय समाज के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त की जा सके। पुरातत्वविदों का कहना है कि यह दुर्लभ खोज न केवल आंध्र प्रदेश बल्कि पूरे भारतीय इतिहास और बौद्ध विरासत के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो
सकती है।