समर न्यूज | चंडीगढ़
चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) में कोविड महामारी के दौरान केंद्र से मिले 99 वेंटिलेटरों में से 64 के काम नहीं करने का मामला लोकसभा में उठा है।
चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार से पूछा कि बड़ी संख्या में वेंटिलेटर खराब होने की स्थिति में गंभीर मरीजों को पर्याप्त जीवनरक्षक सुविधा कैसे उपलब्ध कराई जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने जवाब में बताया कि जीएमसीएच को कोविड काल में कुल 99 वेंटिलेटर दिए गए थे, जिनमें से फिलहाल 35 काम कर रहे हैं।
सांसद ने गैर-कार्यशील वेंटिलेटरों के कारण, उनके रखरखाव और कलपुर्जों की उपलब्धता के साथ-साथ ट्रॉमा सेंटर में तकनीकी और प्रशिक्षित कर्मचारियों की स्थिति पर भी जानकारी मांगी थी। मंत्रालय ने कहा कि जीएमसीएच के अनुसार ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर्याप्त हैं। सरकार ने यह भी बताया कि आईसीयू के सभी उपकरण व्यापक वार्षिक रखरखाव अनुबंध के तहत आते हैं।
{गंभीर मरीजों की क्षमता पर सवाल: वेंटिलेटर गंभीर और जीवन संकट से जूझ रहे मरीजों के उपचार में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में 99 में से केवल 35 मशीनों का चालू होना अस्पताल की गहन चिकित्सा क्षमता और उपकरणों के रखरखाव को लेकर सवाल खड़े करता है। हालांकि, यह आंकड़ा केवल कोविड के दौरान केंद्र से मिले वेंटिलेटरों का है और अस्पताल में उपलब्ध कुल वेंटिलेटरों की संख्या इससे अलग हो सकती है।
{मरम्मत और रखरखाव की चुनौती: मामले ने महामारी के दौरान खरीदे या उपलब्ध कराए गए चिकित्सा उपकरणों के नियमित रखरखाव की जरूरत को भी सामने ला दिया है। जीएमसीएच की ओर से सभी आईसीयू उपकरणों के रखरखाव अनुबंध में होने की बात कही गई है। अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बंद पड़े 64 वेंटिलेटरों को कब तक दोबारा चालू किया जाएगा और उनकी खराबी के पीछे तकनीकी समस्या, कलपुर्जों की कमी या अन्य कारण क्या हैं।