समर न्यूज | चंडीगढ़
पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए पंजाब में मादक पदार्थों की तस्करी की बढ़ती कोशिशों के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा क्षेत्र में निगरानी का तरीका बदल दिया है। जमीन पर नाके लगाने के साथ अब ‘हवाई नाकों’ के जरिए आसमान से होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने पर जोर है।
पंजाब पुलिस व बीएसएफ की संयुक्त कार्रवाई में लगातार ड्रोन से गिराई गई हेरोइन की खेप पकड़ी जा रही है। पिछले साल देश में ड्रोन के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े 305 मामलों में से 298 पंजाब में सामने आए थे। इससे राज्य को इस चुनौती से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र माना जा रहा है।
सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क से जुड़े सीमावर्ती थाने
पंजाब पुलिस ने सीमा से जुड़े इलाकों में तकनीकी निगरानी बढ़ाने के लिए 585 स्थानों पर 2,291 सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। सीमा जिलों के 41 थानों को केंद्रीय सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था से जोड़ा गया है। संवेदनशील गांवों और उन मार्गों पर भी नजर रखी जा रही है जिसका मकसद सीमा पार बैठे संचालकों से लेकर स्थानीय रिसीवर और वितरण नेटवर्क तक पूरी श्रृंखला को तोड़ना है।
तकनीक से ड्रोन का पता लगाने की कोशिश
पंजाब के सीमावर्ती जिले तरनतारन में ‘बाज आंख’ एंटी-ड्रोन प्रणाली की मदद से ड्रोन की गतिविधि का पता लगाकर कार्रवाई की गई थी। इसके बाद खेतों से हेरोइन की खेप बरामद हुई और ड्रोन भी कब्जे में लिया गया। अमृतसर क्षेत्र में पुलिस और बीएसएफ ने संयुक्त अभियान में करीब 27 किलोग्राम हेरोइन बरामद की। इससे पहले अमृतसर में ही एक अन्य मामले में 8.378 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई थी जांच में आशंका जताई गई कि खेप ड्रोन के जरिये सीमा पार से गिराई गई थी।
अब रिसीवर तक पहुंचने पर जोर
सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह है कि ड्रोन से सीमा पार से खेप पहुंचाने के बाद उसे जमीन पर मौजूद स्थानीय तस्कर उठा लेते हैं। इसलिए अब कार्रवाई का फोकस केवल ड्रोन को पकड़ने या गिराने तक सीमित नहीं है। पुलिस खेप लेने वाले लोगों, उनके संपर्कों, बैंकिंग लेनदेन और मोबाइल संचार की जांच कर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पुलिस और बीएसएफ के बीच बेहतर समन्वय तथा आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक इस लड़ाई में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ऐसे में ‘हवाई नाकों’ के साथ जमीन पर खुफिया तंत्र को मजबूत करना ही इस नेटवर्क को स्थायी रूप से तोड़ने की सबसे बड़ी कुंजी होगी।