Summer express/हमीरपुर/अरविंद-:हमीरपुर जिले के उपमंडल भोरंज के लूद्र गांव से एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जहां एक परिवार ने दूसरी बेटी के जन्म को पूरे उत्साह और सम्मान के साथ उत्सव में बदल दिया। परिवार ने समाज को सकारात्मक संदेश देते हुए नवजात बच्ची का स्वागत फूलों से सजी कार में घर लाकर किया। इस अनोखी पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है और लोग इसे बेटियों के सम्मान की दिशा में एक मिसाल मान रहे हैं।जानकारी के अनुसार, 29 जुलाई को हमीरपुर के एक निजी अस्पताल में बच्ची का जन्म हुआ। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद परिवार ने नवजात को घर लाने के लिए विशेष तैयारियां कीं। पिता जोगेंद्र कुमार ने अपनी कार को रंग-बिरंगे फूलों से सजवाया और पूरे परिवार के साथ खुशी के माहौल में बेटी को घर लेकर पहुंचे। गांव में इस दृश्य को देखने वाले लोगों ने परिवार की सोच की प्रशंसा की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया।
जोगेंद्र कुमार ने बताया कि उनके परिवार में पहले से सात वर्ष की एक बेटी है और अब दूसरी बेटी के आगमन से खुशियां दोगुनी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि दोनों बेटियां उनके लिए लक्ष्मी का स्वरूप हैं और परिवार में उनके आने से घर में सुख-समृद्धि का एहसास होता है। उनका मानना है कि बेटा और बेटी दोनों समान हैं तथा दोनों को बराबर अवसर, प्यार और सम्मान मिलना चाहिए।उन्होंने कहा कि बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी माता-पिता की होती है। इसलिए किसी भी परिवार को बेटियों और बेटों के बीच भेदभाव नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समाज बेटियों को समान अवसर देगा तो वे हर क्षेत्र में परिवार और देश का नाम रोशन करेंगी।आज भी कई जगहों पर बेटियों के जन्म को लेकर संकीर्ण सोच देखने को मिलती है। कहीं बेटियों को बोझ समझा जाता है तो कहीं उनके साथ भेदभाव किया जाता है। ऐसे माहौल में भोरंज के इस परिवार ने अपनी सोच और व्यवहार से यह साबित किया है कि बेटी का जन्म भी उतनी ही खुशी और गर्व का अवसर है जितना बेटे का।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे लोगों को बेटियों के प्रति सम्मान और समानता का संदेश मिलता है। परिवार का यह कदम केवल एक खुशी का इजहार नहीं, बल्कि सामाजिक सोच बदलने की दिशा में एक सार्थक प्रयास भी माना जा रहा है।भोरंज के लूद्र गांव की यह पहल अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का मानना है कि यदि हर परिवार बेटियों को इसी सम्मान और स्नेह के साथ अपनाए तो समाज में लैंगिक समानता और बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को और अधिक मजबूती मिलेगी।