समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को पेपर लीक और छात्र आंदोलनों का मुद्दा पूरे दिन चर्चा के केंद्र में रहा। सदन ने पेपर लीक की घटनाओं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों व नागरिकों के खिलाफ कथित बल प्रयोग, हिरासत तथा आपराधिक मामलों की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि वर्ष 2014 से देशभर में 93 पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, जिनमें 2019 से 2024 के बीच 65 मामले दर्ज हुए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में पंजाब में एक भी भर्ती परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक रोकने में प्रभावी कदम उठाने में विफल रही है। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि विपक्ष पंजाब सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगा रहा है, जबकि राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं परीक्षा के संचालन में कोई गड़बड़ी या नकल की शिकायत सामने आती है तो तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, लेकिन हर मामले को पेपर लीक बताकर युवाओं को भ्रमित करना उचित नहीं है।
पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। विपक्षी सदस्यों का कहना था कि परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं और सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच कराने के पक्ष में है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
छात्रों पर बलप्रयोग व आपराधिक मुकदमों की निंदा
बहस के दौरान सदन ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नागरिकों के खिलाफ कथित अत्यधिक बल प्रयोग, मनमानी हिरासत और आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाने की भी निंदा की। प्रस्ताव में कहा गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। विधानसभा ने देशभर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्रों के प्रति एकजुटता भी व्यक्त की। सदन ने मांग की कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और नागरिकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लिया जाए। प्रस्ताव में शिक्षा एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित उन सभी लोगों का भी उल्लेख किया गया, जिनके खिलाफ प्रदर्शन करने पर कार्रवाई किए जाने का आरोप है।
भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगातार तकनीकी और प्रशासनिक सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि योग्य उम्मीदवारों को बिना किसी भेदभाव के रोजगार मिले और भर्ती प्रणाली पर लोगों का विश्वास मजबूत हो। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सामने आए पेपर लीक के मामलों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। उनके अनुसार केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उसे सख्ती से लागू करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में राजनीति के बजाय ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।
पेपर लीक मुद्दे पर हंगामा कांग्रेस का वॉकआउट
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में पेपर लीक के मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक गले में काला पटका पहनकर सदन पहुंचे और फरीदकोट में फार्मेसी परीक्षा का पेपर लीक होने का आरोप लगाते हुए संबंधित मंत्री के इस्तीफे की मांग की। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया कि राज्य में साढ़े चार वर्षों में छह पेपर लीक हुए हैं, जिनमें पांच शिक्षा विभाग और एक स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है। उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग की। हंगामे के बाद कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया। जवाब में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब नहीं, बल्कि कांग्रेस खुद “लीक” हो चुकी है।