Summer express, मोनिका रावत ,पंचकूला | हरियाणा के बहुचर्चित ₹560 करोड़ के बैंक घोटाला मामले में गिरफ्तार आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को फिलहाल राहत नहीं मिली है। पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।
सुनवाई के दौरान पंकज अग्रवाल की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्होंने केवल सरकारी विभागों के बैंक खातों को एक बैंक से दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने की प्रशासनिक मंजूरी दी थी। बचाव पक्ष का कहना था कि उन्होंने इस प्रक्रिया से कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं लिया और उनके खिलाफ किसी अवैध लेनदेन का प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है।
वहीं, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि मामला केवल बैंक बदलने की मंजूरी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी के अनुसार, पंकज अग्रवाल की स्वीकृति के आधार पर सरकारी विभागों के खाते नियमों की अनदेखी करते हुए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खोले गए, जिसके बाद सरकारी धन का कथित रूप से फर्जी लेनदेन और डायवर्जन किया गया।
सीबीआई ने अदालत में दावा किया कि जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि सरकारी धन के दुरुपयोग की जानकारी होने के बावजूद आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। एजेंसी का यह भी कहना है कि पंकज अग्रवाल की इस कथित साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका रही तथा वे मुख्य आरोपी के संपर्क में भी थे।
सीबीआई के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और आरोपियों के बीच वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों तथा अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच की जा रही है। एजेंसी का तर्क था कि इस स्तर पर जमानत दिए जाने से जांच प्रभावित हो सकती है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष सीबीआई अदालत ने पंकज अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज कर दी। उल्लेखनीय है कि करोड़ों रुपये के इस चर्चित बैंक घोटाले की सीबीआई लगातार जांच कर रही है और मामले में कई आरोपियों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन और कथित अनियमितताओं की विभिन्न कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।