Summer express, चंडीगढ़। हरियाणा में नगर पालिका कर्मचारियों और अग्निशमन कर्मियों की हड़ताल का असर अब शहरों की सफाई व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। हड़ताल के चलते प्रदेश के 87 निकायों में सफाई, सीवर सफाई, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी जरूरी नागरिक सेवाएं प्रभावित हुई हैं। हड़ताल के दूसरे दिन विभिन्न शहरों में करीब 3 हजार टन कूड़ा नहीं उठाया जा सका। बारिश के कारण जगह-जगह जमा कचरे से बदबू फैलने लगी है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
नगर पालिका कर्मचारी संघ और अग्निशमन कर्मचारी यूनियन के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं। संघ के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री के अनुसार, प्रदेश में 45 हजार से अधिक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। शनिवार को हड़ताल का तीसरा दिन है, लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि 13 मई को सरकार के साथ हुई बैठक में 17 मांगों पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद छह अगस्त को जारी सरकारी पत्र में उन मांगों को शामिल नहीं किया गया। इसी को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी है। अब नगर पालिका कर्मचारी संघ और अग्निशमन कर्मचारी यूनियन की राज्य कमेटी की बैठक में हड़ताल को आगे बढ़ाने को लेकर फैसला लिया जाएगा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सीवर सफाई के काम से ठेका प्रथा खत्म करना शामिल है। संघ का कहना है कि ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को विभागीय रोल पर लिया जाए और जब तक उन्हें विभागीय रोल पर नहीं लिया जाता, तब तक बैंक के माध्यम से न्यूनतम वेतन दिया जाए।
इसके अलावा कर्मचारी सभी कर्मियों को ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली अन्य वैधानिक सुविधाएं देने की मांग कर रहे हैं। कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने तथा सीवर सफाई कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने के साथ नए पद सृजित कर नियमित भर्ती करने की मांग भी रखी गई है।
हड़ताल लंबी खिंचने की स्थिति में प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था और अन्य नागरिक सेवाओं पर इसका असर और बढ़ सकता है। फिलहाल जगह-जगह कचरा जमा होने और बारिश के कारण उससे उठ रही दुर्गंध से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से जल्द मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की है।