Summer express, धर्मशाला (राहुल चावला)। पेंशनर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी हिमाचल प्रदेश ने प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। धर्मशाला में पत्रकार वार्ता के दौरान कमेटी के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि 15 अगस्त तक पेंशनरों की लंबित मांगों, दो डीए किस्तों और बकाया एरियर के भुगतान को लेकर अधिसूचना जारी नहीं हुई तो अक्टूबर के पहले सप्ताह से प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
सुरेश ठाकुर ने बताया कि पेंशनरों की मांगों को लेकर शाहपुर में आयोजित रोष रैली में करीब 2,000 से 2,500 पेंशनरों ने भाग लिया था। उन्होंने कहा कि सरकार को कई बार लंबित वित्तीय लाभ जारी करने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने 15 अगस्त तक फैसला नहीं लिया तो पेंशनर जिला मुख्यालयों पर तंबू लगाकर दिन-रात आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
कमेटी ने सरकार से पेंशनरों को 15 प्रतिशत डीए देने और लंबित एरियर का 100 प्रतिशत भुगतान करने की मांग की है। इसके अलावा मेडिकल बिलों का जल्द निपटारा करने तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के कम्यूटेशन, लीव एनकैशमेंट और ग्रेच्युटी से संबंधित लंबित भुगतान जारी करने की मांग भी उठाई गई। सुरेश ठाकुर ने कहा कि एचआरटीसी पेंशनरों को समय पर पेंशन के साथ लंबित डीए और अन्य वित्तीय लाभ भी दिए जाने चाहिए।
उन्होंने बिजली बोर्ड समेत अन्य निगमों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की मांग भी रखी। इसके साथ ही शहरी निकायों के पेंशनरों को संशोधित पेंशन का लाभ देने और यूजीसी वेतनमान के तहत आने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में संशोधन करने की मांग की गई। पेंशनरों ने लाइफ सर्टिफिकेट जमा करवाने के लिए डिजिटल व्यवस्था के साथ पुरानी ऑफलाइन सुविधा भी जारी रखने की मांग की है।
सुरेश ठाकुर ने कहा कि पेंशनर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी गैर-राजनीतिक संगठन है और वह कांग्रेस तथा भाजपा दोनों को समान रूप से देखता है। उन्होंने प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पेंशनरों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया तो आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठन अपनी राजनीतिक रणनीति पर विचार कर सकता है।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पेंशनरों के नेतृत्व को मजबूत किया जाएगा और तीसरे मोर्चे की दिशा में भी कदम उठाने पर विचार किया जा सकता है। कमेटी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल संगठन सरकार से बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठाने के पक्ष में है, लेकिन मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।