Summer express, चंडीगढ़। सतलुज नदी के किनारे बसे फिरोजपुर ग्रामीण क्षेत्र के गांवों को बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए सरकार ने सुरक्षा उपाय तेज कर दिए हैं। विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान फिरोजपुर ग्रामीण के विधायक एडवोकेट रजनीश कुमार दहिया ने नदी किनारे कमजोर हो चुके बाढ़ सुरक्षा ढांचों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से इनके पुनर्निर्माण और मरम्मत की समयसीमा स्पष्ट करने की मांग की।
विधायक ने बताया कि ममदोट उपतहसील के दोना तेलू मल्ल, कालू अराइयां हिठाड़, फत्तेवाला हिठाड़, रुहेला हाजी, गंधू किलचा हिठाड़ और निहाला किलचा समेत कई गांव सतलुज नदी के किनारे स्थित हैं। पिछले वर्षों में आई बाढ़ के कारण नदी किनारे बने सुरक्षा ढांचे कमजोर हो गए हैं। कई स्थानों पर पत्थर निकलने और संरचनाओं के क्षतिग्रस्त होने से बरसात के दौरान ग्रामीणों के साथ-साथ उनकी कृषि भूमि पर भी खतरा बना रहता है।
जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने सदन में बताया कि प्रश्न में बताए गए स्टड नंबर 512 से 520 के लिए विभाग अलग से नंबरिंग नहीं करता। बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्य फ्लड प्रोटेक्शन बंध की आरडी प्रणाली के आधार पर चिन्हित किए जाते हैं और इसी के अनुसार उनकी निगरानी की जाती है।
मंत्री के अनुसार दोना तेलू मल्ल में आरडी 12,410 से 16,500 के बीच फ्लड प्रोटेक्शन बंध के साथ सुरक्षा ढांचे वर्ष 1995 के आसपास बनाए गए थे। पिछले बाढ़ सीजन में जलस्तर बढ़ने और ढांचों के पानी में डूबने के कारण दो स्पर और आठ स्टड क्षतिग्रस्त हुए थे। हालांकि मुख्य फ्लड प्रोटेक्शन बंध सुरक्षित रहा और उसे किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
गोयल ने बताया कि क्षतिग्रस्त ढांचों का फील्ड निरीक्षण कराया जा चुका है। विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर मरम्मत और पुनर्निर्माण की योजना फ्लड मैनेजमेंट प्रोग्राम में शामिल की गई है। इसके लिए तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेज दी गई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के फ्लड प्रीपेयर्डनेस प्रोग्राम के तहत ममदोट क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील स्थानों की विस्तृत समीक्षा की गई। निगरान इंजीनियरों की समिति ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक सुरक्षा उपाय सुझाए, जिसके बाद मुख्य अभियंताओं की उच्चस्तरीय समिति ने प्रस्तावों की समीक्षा कर प्राथमिकताएं तय कीं।
मंत्री ने बताया कि गंधू किलचा हिठाड़ में आरडी 10,650 से 11,700 के बीच बाढ़ सुरक्षा के लिए नया स्पर, 700 फुट जियो-बैग रिवेटमेंट और पांच स्टड तैयार किए गए हैं। इन कार्यों पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इन निर्माण कार्यों से सतलुज के किनारे बसे गांवों और कृषि भूमि की बाढ़ से सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में मजबूत हुई है।