समर न्यूज। चंडीगढ़
पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में अंगदान को लेकर तस्वीर एक जैसी नहीं है। राज्यवार आंकड़ों के अनुसार 2024 में पंजाब 614 अंगदाताओं के साथ इन चारों में सबसे आगे था। इसके बाद चंडीगढ़ में 282, हरियाणा में 116 और हिमाचल प्रदेश में केवल आठ अंगदाता दर्ज किए गए। पूरे उत्तर भारत में 2,257 अंगदाता दर्ज हुए थे।
इन आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
अंगदाता और अंग प्रत्यारोपण एक ही चीज नहीं हैं। एक मृत अंगदाता से कई अंग प्राप्त हो सकते हैं और उन्हें अलग-अलग मरीजों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इसलिए किसी राज्य में अंगदाताओं की संख्या और वहां हुए कुल प्रत्यारोपण की संख्या अलग-अलग हो सकती है।
2024 में 614 अंगदाताओं के साथ पंजाब ने चंडीगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश को पीछे छोड़ा था। हालांकि पूरे उत्तर भारत की सूची में पंजाब दूसरे स्थान पर था। राजस्थान 648 अंगदाताओं के साथ उससे आगे था। उत्तर प्रदेश में 523, चंडीगढ़ में 282, हरियाणा में 116, जम्मू-कश्मीर में 47, उत्तराखंड में 19 और हिमाचल प्रदेश में आठ अंगदाता दर्ज किए गए थे।
पंजाब में अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों का नेटवर्क लगातार विकसित हुआ है। राज्य में 2024 के दौरान 621 अंग प्रत्यारोपण दर्ज किए गए थे। इनमें 616 गुर्दा और पांच यकृत प्रत्यारोपण शामिल थे। इससे पता चलता है कि राज्य में प्रत्यारोपण की सुविधा भी अपेक्षाकृत मजबूत है।
हरियाणा में सुधार की गुंजाइश: हरियाणा में 2024 में 116 अंगदाता दर्ज हुए थे। राज्य में प्रत्यारोपण की सुविधा बढ़ रही है, लेकिन मृत अंगदान को बढ़ाने की जरूरत अभी भी बनी हुई है। राज्य सरकार के अनुसार अंगदान में ब्रेन-स्टेम डेथ की पहचान, परिवार की सहमति, प्रशिक्षित समन्वयकों और अंगों को समय पर अस्पतालों तक पहुंचाने की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। हरियाणा में पीजीआईएमएस रोहतक को राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन की जिम्मेदारी दी गई है।
2026 में हरियाणा के लिए एक बड़ी उपलब्धि पंचकूला के चंडीमंदिर स्थित कमांड अस्पताल में सामने आई। मई में ब्रेन-स्टेम डेथ घोषित 41 वर्षीय महिला के परिवार ने हृदय, दोनों गुर्दे, यकृत और अग्न्याशय दान करने की सहमति दी।
इससे चार गंभीर मरीजों को जीवन मिला। इस मामले में कमांड अस्पताल में पहली बार हृदय निकाला गया। अंगों को पीजीआईएमईआर सहित विभिन्न प्रत्यारोपण केंद्रों तक
पहुंचाया गया।
कहां कितने अंगदाता
2024 के अंतिम समान तुलनीय आंकड़ों में पंजाब 614 के साथ इन चारों में पहले, चंडीगढ़ 282 के साथ दूसरे, हरियाणा 116 के साथ तीसरे और हिमाचल प्रदेश आठ के साथ चौथे स्थान पर था। यह आंकड़े 2024 के हैं, इन्हें 2026 का आंकड़ा बताना सही नहीं होगा। 2025-26 के लिए समान राज्यवार आधिकारिक आंकड़े जारी होने पर तस्वीर में बदलाव संभव है। अंगदान बढ़ाने के लिए केवल प्रतिज्ञा अभियान पर्याप्त नहीं है। अस्पतालों में संभावित ब्रेन-स्टेम डेथ मामलों की पहचान, परिवारों की संवेदनशील काउंसलिंग, प्रशिक्षित प्रत्यारोपण समन्वयक, त्वरित अंग निकासी और सुरक्षित परिवहन की पूरी श्रृंखला मजबूत करनी होगी। 2026 में चंडीमंदिर के मामले ने दिखाया कि विभिन्न एजेंसियों के बेहतर समन्वय से एक दाता के अंग कई मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं। अब पंजाब की बढ़त को बनाए रखना, चंडीगढ़ की मजबूत व्यवस्था का विस्तार करना और हरियाणा-हिमाचल में मृत अंगदान बढ़ाना क्षेत्र की अगली बड़ी चुनौती है।
चंडीगढ़ का प्रदर्शन आबादी के हिसाब से अहम
संख्या के लिहाज से चंडीगढ़ पंजाब से पीछे है, लेकिन छोटी आबादी को देखते हुए 282 अंगदाताओं का आंकड़ा महत्वपूर्ण है। चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर उत्तर भारत में अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए प्रमुख केंद्र है। हरियाणा सरकार के अनुसार भी हरियाणा के लिए क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन यानी आरओटीटीओ पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ है, जबकि राज्य का एसओटीटीओ रोहतक में है। पीजीआईएमईआर की भूमिका केवल चंडीगढ़ तक सीमित नहीं है। 2015 में आरओटीटीओ नॉर्थ के रूप में नामित संस्थान पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अंगदान के समन्वय, प्रशिक्षण, जागरूकता और क्षमता निर्माण में भूमिका निभाता है।
2026 में पीजीआईएमईआर की बड़ी उपलब्धि
अंगदान के क्षेत्र में 2026 में पीजीआईएमईआर और पूरे आरओटीटीओ नॉर्थ नेटवर्क को बड़ी राष्ट्रीय मान्यता मिली। तीन अगस्त को आरओटीटीओ नॉर्थ को लगातार तीसरे वर्ष राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन का पुरस्कार दिया गया। यह इस पुरस्कार की शुरुआत के बाद उसका चौथा राष्ट्रीय सम्मान है। इससे पहले संस्थान को 2019 में भी यह पुरस्कार मिल चुका है। पीजीआईएमईआर को मिले इस सम्मान का दायरा केवल संस्थान की अपनी उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। आरओटीटीओ नॉर्थ पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अंगदान को बढ़ावा देने और समन्वय का काम करता है। इसी नेटवर्क के तहत पंजाब के डीएमसी लुधियाना को भी प्रत्यारोपण क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए सम्मान मिला।
हिमाचल प्रदेश सबसे पीछे
हिमाचल प्रदेश में 2024 में केवल आठ अंगदाता दर्ज हुए थे। चारों क्षेत्रों में यह सबसे कम संख्या थी। हालांकि, इसे केवल जागरूकता की कमी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियां, बड़े प्रत्यारोपण केंद्रों तक पहुंच, ब्रेन-स्टेम डेथ की पहचान और परिवारों की काउंसलिंग जैसे कई कारक मृत अंगदान की संख्या को प्रभावित करते हैं। हिमाचल के मरीजों और दाता परिवारों के लिए चंडीगढ़ का पीजीआईएमईआर महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। ऐसे में राज्य में जिला स्तर पर संभावित दाताओं की पहचान और अस्पतालों में प्रशिक्षित प्रत्यारोपण समन्वयकों की व्यवस्था मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।