Summer express ,राकेश कुमार शर्मा ,करनाल, हरियाणा। करनाल की 11वीं कक्षा की छात्रा यशिका ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर परिवार के साथ-साथ पूरे हरियाणा का नाम रोशन किया है। नॉन-मेडिकल की छात्रा यशिका का चयन भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए यूनाइटेड स्पेस स्कूल के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में हुआ। कार्यक्रम के तहत उसने अमेरिका में 15 दिन बिताए और 35 देशों से आए विद्यार्थियों के साथ अंतरिक्ष विज्ञान तथा मंगल ग्रह से जुड़े मिशन पर काम किया।
यशिका के लिए यह सफर महज एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भागीदारी नहीं था, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उसके बड़े सपनों की ओर पहला महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। अमेरिका में उसे अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से समझने के साथ-साथ विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों से संवाद करने का अवसर मिला। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अंतरिक्ष अभियानों, वैज्ञानिक तकनीक और मंगल ग्रह से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी गई।
‘ग्रीन टीम’ का हिस्सा बनकर मंगल ग्रह पर मानव आवास की संभावनाओं पर काम
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार अलग-अलग टीमों में बांटा गया था। यशिका को ‘ग्रीन टीम’ में शामिल किया गया, जहां उसकी भूमिका सभ्यता और मंगल ग्रह पर मानव आवास से जुड़े विषयों पर केंद्रित रही। टीम ने मंगल मिशन से संबंधित प्रोजेक्ट पर काम करते हुए यह समझने का प्रयास किया कि भविष्य में मंगल ग्रह पर इंसानों के रहने की संभावनाएं क्या हो सकती हैं और वहां जीवन बसाने में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
इस दौरान यशिका ने विभिन्न देशों के विद्यार्थियों के साथ मिलकर टीमवर्क किया। इससे उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने, विचार साझा करने और अलग-अलग देशों के विद्यार्थियों की कार्यशैली को समझने का अनुभव मिला।
अंतरिक्ष विज्ञान के साथ भारतीय संस्कृति की भी दिखाई झलक
कार्यक्रम में विज्ञान के अलावा सांस्कृतिक गतिविधियों को भी महत्व दिया गया। पहले सप्ताह आयोजित सांस्कृतिक मेले में अलग-अलग देशों के विद्यार्थियों ने अपने देश की संस्कृति, संगीत, नृत्य और खान-पान को प्रस्तुत किया। भारत का प्रतिनिधित्व कर रही यशिका ने इस दौरान ब्रेड पकौड़ा बनाकर विदेशी विद्यार्थियों को भारतीय खान-पान और संस्कृति से रूबरू कराया।
इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर यशिका ने न केवल दूसरे देशों की संस्कृतियों को जाना, बल्कि भारत की विविधता और परंपराओं को भी दुनिया के सामने रखने का अवसर हासिल किया।
कल्पना चावला से मिली अंतरिक्ष में आगे बढ़ने की प्रेरणा
करनाल की धरती से अंतरिक्ष की ओर कदम बढ़ाने वाली यशिका के लिए कल्पना चावला सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। यशिका का सपना भविष्य में एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनने का है। वह अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़कर देश का नाम रोशन करना चाहती है और भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों का हिस्सा बनने की इच्छा रखती है।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। यशिका ने इसे अपने 15 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय अनुभव की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
तीन चरणों की चयन प्रक्रिया पार कर पहुंची अमेरिका
फाउंडेशन फॉर इंटरनेशनल स्पेस एजुकेशन की मैनेजर डॉ. पारुल के अनुसार यह अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम वर्ष 1998 से आयोजित किया जा रहा है। इसमें 15 से 19 वर्ष की आयु के विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है।
पहले चरण में विद्यार्थियों से निबंध लिखवाया जाता है, जिसके आधार पर प्रारंभिक स्क्रीनिंग होती है। इसके बाद ऑनलाइन इंटरव्यू आयोजित किया जाता है, जिसमें NASA से जुड़े विशेषज्ञ भी विद्यार्थियों का साक्षात्कार लेते हैं। चयनित विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान से संबंधित विषयों की जानकारी देने के साथ अंतरिक्ष यात्रियों और विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखने का अवसर मिलता है।
मां बोलीं- बेटी की उपलब्धि पर गर्व, अमेरिका भेजने को लेकर थी चिंता
यशिका की मां नीलम ने कहा कि बेटी का अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए चयन होना परिवार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि बेटी पहली बार इतनी दूर अमेरिका जा रही थी, इसलिए एक मां के तौर पर उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक थी। हालांकि पूरा सफर शानदार रहा। यशिका ने वहां रहकर कई नई चीजें सीखीं और सुरक्षित वापस लौटी, जिससे परिवार की खुशी और बढ़ गई।
पिता ने कहा- करनाल से बाहर तक नहीं गई थी, अब अमेरिका में किया भारत का प्रतिनिधित्व
यशिका के पिता गौरव मेहला ने कहा कि बेटी ने अमेरिका जाकर भारत का प्रतिनिधित्व कर पूरे परिवार को गौरवान्वित किया है। उन्होंने बताया कि अमेरिका जाने से पहले यशिका करनाल से बाहर तक नहीं गई थी, लेकिन अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर उसने अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच बनाई।
उन्होंने कहा कि 15 दिनों के इस सफर में यशिका ने अंतरिक्ष विज्ञान के साथ-साथ विभिन्न देशों के विद्यार्थियों के साथ काम करने का जो अनुभव हासिल किया है, वह उसके भविष्य में काफी उपयोगी साबित होगा।
करनाल की यशिका की यह उपलब्धि उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। कल्पना चावला की धरती से निकलकर यशिका ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है और अब उसकी नजर एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनकर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई पहचान बनाने पर है।