सहजप्रीत सिंह | लुधियाना
समर न्यूज
रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के उस पवित्र रिश्ते का प्रतीक है, जिसमें दूरियां चाहे कितनी भी हों, लेकिन प्यार और अपनापन कभी कम नहीं होता। रक्षाबंधन के अवसर पर लुधियाना की ताजपुर जेल में भी इस रिश्ते की भावुक तस्वीर देखने को मिली। अपने भाइयों से मिलने और उनकी कलाई पर राखी बांधने के लिए कई बहनें दूर-दराज के इलाकों से जेल पहुंचीं।
किसी बहन के हाथ में राखी थी तो किसी के हाथ में भाई के लिए मिठाई और घर से जुड़ी छोटी-छोटी चीजें। सुबह से ही ताजपुर जेल के बाहर बहनों की आवाजाही शुरू हो गई। लंबे इंतजार के बाद जब उन्हें अपने भाइयों से मिलने का अवसर मिला तो कई बहनों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना की। ताजपुर जेल में हुई यह मुलाकात सामान्य मुलाकातों से अलग और भावनाओं से भरी रही। कुछ पलों के इस मिलन में भाई-बहनों के बीच वर्षों का प्यार, चिंता और अपनापन दिखाई दिया।
बहनों ने भाइयों को राखी बांधते हुए उन्हें परिवार की याद दिलाई और बेहतर जीवन जीने की उम्मीद जताई। वहीं, भाइयों ने भी अपनी बहनों को हर परिस्थिति में साथ देने का भरोसा दिलाया। कई बहनों के लिए यह दिन खुशी के साथ-साथ दर्द भी लेकर आया। भाई सामने था, लेकिन दोनों के बीच जेल की चारदीवारी और परिस्थितियों की दूरी थी।
राखी बांधते समय कई बहनों की आंखों में यही चिंता नजर आई कि अगली बार उन्हें भाई की कलाई पर राखी बांधने का मौका कब मिलेगा। इस भावुक पल में कुछ बहनों की आंखों से आंसू भी छलक पड़े।
ताजपुर जेल में रक्षाबंधन के इस अवसर ने यह एहसास कराया कि परिस्थितियां भले ही इंसान को अपनों से दूर कर दें, लेकिन रिश्तों की डोर को कमजोर नहीं कर सकतीं। भाई की कलाई पर बंधा राखी का छोटा-सा धागा बहन के प्यार, विश्वास और उसकी दुआओं का प्रतीक बन गया।