Summer express, करनाल (राकेश कुमार शर्मा)। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता (SE) जीतू राम तंवर की आत्महत्या का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद भी परिजनों और दलित समाज के लोगों ने शव लेने से इनकार कर दिया। परिवार की मांग है कि कथित तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। परिजनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
जीतू राम तंवर के भाई सुरेश कुमार और दलित समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि वह पिछले काफी समय से कुछ अधिकारियों के व्यवहार और कथित प्रताड़ना से परेशान थे। परिजनों के मुताबिक, जीतू राम को अपनी बहाली की उम्मीद थी, लेकिन लगातार मानसिक दबाव के कारण वह परेशान चल रहे थे। परिवार का दावा है कि उन्होंने अपनी शिकायतें आईजी सोनीपत, बिजली विभाग के एमडी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई थीं, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली।
परिजनों ने मामले में कथित जातीय भेदभाव और उत्पीड़न के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जीतू राम को उनकी जाति को लेकर अपमानजनक टिप्पणियों और भेदभाव का सामना करना पड़ा। परिवार ने सवाल उठाया कि यदि एक अधिकारी को कथित तौर पर इस तरह की परिस्थितियों से गुजरना पड़ा तो आम दलित व्यक्ति के सामने कितनी मुश्किलें हो सकती हैं। दलित समाज के प्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
परिवार ने एफआईआर की कार्रवाई को लेकर भी पुलिस पर सवाल उठाए हैं। परिजनों के अनुसार, घटना के बाद पुलिस को सुसाइड नोट सौंपा गया था, लेकिन एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई। उनका दावा है कि उन्हें दी गई एफआईआर की प्रति में कथित आरोपियों को नामजद नहीं किया गया है। इसे लेकर परिजनों और समाज के लोगों में नाराजगी है।
पोस्टमार्टम में हुई देरी पर भी परिवार ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक वरिष्ठ अधिकारी की मौत के मामले में पोस्टमार्टम करीब 12 घंटे बाद किया गया। परिजनों ने पुलिस प्रशासन से इस देरी का कारण स्पष्ट करने की मांग की है और आरोप लगाया कि पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।
परिजनों और दलित समाज के लोगों ने कहा कि उनकी मांग है कि कथित जिम्मेदार अधिकारियों को मामले में नामजद किया जाए, निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों की गिरफ्तारी हो। उनका कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, वे जीतू राम तंवर का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
फिलहाल जीतू राम तंवर की मौत का मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस के सामने सुसाइड नोट, मृतक की ओर से पहले दी गई शिकायतों और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की चुनौती है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत के पीछे किन परिस्थितियों की भूमिका थी और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।