बैंक कर्मचारियों ने निकाली रैली, सरकार से लंबित मांगें जल्द पूरी करने की मांग
मांगें नहीं मानी तो सितंबर में दोबारा हड़ताल, 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
Summer express हमीरपुर/धर्मशाला/ऊना। बैंक कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को राष्ट्रव्यापी एकदिवसीय सांकेतिक हड़ताल का असर हिमाचल प्रदेश में भी देखने को मिला। हमीरपुर, धर्मशाला और ऊना में बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल कर प्रदर्शन किया और कई स्थानों पर रैली निकालकर केंद्र सरकार व बैंक प्रबंधन के खिलाफ रोष जताया। हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे आम लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
बैंक कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में सप्ताह में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करना, परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव में समानता, नई भर्ती कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करना और सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारियों की पेंशन में संशोधन शामिल हैं।बैंक कर्मचारी नेताओं का कहना है कि फाइव डे बैंकिंग की मांग लंबे समय से लंबित है। कर्मचारियों के अनुसार वर्ष 2015 में 10वें द्विपक्षीय समझौते के दौरान पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग रखी गई थी। उस समय दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश लागू करने के साथ भविष्य में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद 11वें और 12वें द्विपक्षीय समझौते होने के बावजूद यह मांग पूरी नहीं हुई।कर्मचारियों का कहना है कि मार्च 2024 में भी पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था को लेकर प्रस्ताव और सहमति बनी थी, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया। बैंक कर्मचारियों ने कहा कि यदि सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू की जाती है तो वे कार्यदिवसों में प्रतिदिन अतिरिक्त समय देकर इसकी भरपाई करने के लिए तैयार हैं।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक, शेयर बाजार और सेबी सहित कई वित्तीय संस्थानों में पांच दिन कार्य व्यवस्था लागू है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अभी भी सप्ताह में छह दिन काम कर रहे हैं। उनका आरोप है कि वित्त मंत्रालय की ओर से भी इस संबंध में सिफारिश की जा चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से मामले को लगातार टाला जा रहा है।
इंसेंटिव में समानता की मांग
बैंक कर्मचारियों ने परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव में भी समानता की मांग उठाई है। कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि बैंक के प्रदर्शन और लाभ में योगदान देने वाले निचले स्तर के कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों के बीच इंसेंटिव में काफी अंतर है।हमीरपुर में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के सर्किल सचिव अजय कतना ने कहा कि यूनियन की मांग है कि बैंक के प्रदर्शन और लाभ के आधार पर कर्मचारियों को पांच से 15 दिनों तक का इंसेंटिव दिया जाए। इसके अलावा बैंकिंग क्षेत्र में फील्ड पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए इंसेंटिव व्यवस्था में समानता लाई जानी चाहिए।
धर्मशाला में हिमाचल बैंक एम्प्लाइज फेडरेशन एवं पीएनबी स्टाफ यूनियन हिमाचल प्रदेश के जनरल सेक्रेटरी राजकुमार गौतम ने भी इंसेंटिव व्यवस्था में असमानता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेवाओं को जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंचाने में क्लर्क, पीएन और स्केल-1 से 3 तक के कर्मचारियों की अहम भूमिका रहती है, इसलिए इंसेंटिव में उनके योगदान को उचित महत्व मिलना चाहिए।
पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग
बैंक कर्मचारी संगठनों ने वर्ष 2010 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही लंबे समय पहले सेवानिवृत्त हुए बैंक कर्मचारियों की पेंशन में संशोधन की मांग की गई है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि ऐसे कई पेंशनर्स हैं, जिनकी मूल पेंशन पुरानी वेतन संरचना के आधार पर निर्धारित हुई थी। उनकी पेंशन को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित किया जाना चाहिए।
वर्कफोर्स को लेकर भी उठाई आवाज
ऊना में बैंक कर्मचारियों ने वर्कफोर्स को स्केल-1 से स्केल-3 तक एक साथ जोड़ने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। कर्मचारियों का कहना है कि कार्यभार और कर्मचारियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए वर्कफोर्स का उचित विभाजन किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और बैंकिंग सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
बैंक कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो सितंबर में दोबारा आंदोलन किया जाएगा। संगठनों के अनुसार 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय हड़ताल प्रस्तावित है। इसके बावजूद मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 26 अक्टूबर से देशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।कर्मचारी नेताओं ने कहा कि नोटबंदी और कोरोना महामारी जैसे मुश्किल दौर में भी बैंक कर्मचारियों ने लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बावजूद उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर निर्णय नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और कर्मचारियों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए।