Summer express/मंडी, धर्मवीर-: छोटी काशी मंडी के प्राचीन सिद्ध गणपति मंदिर में दस दिवसीय गणेश उत्सव का शुभारंभ हो गया है। इस वर्ष उत्सव के दौरान एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। मंदिर प्रबंधन ने गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन नहीं करने का निर्णय लिया है। हालांकि प्रतिमा को मंदिर परिसर में विधिवत स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी और गणेश चतुर्दशी के अवसर पर भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाएगी।मंदिर के पुजारी राजन ने बताया कि इस बार सिद्ध गणपति मंदिर में 38वां गणेश उत्सव मनाया जा रहा है। पिछले 37 वर्षों से गणेश जी की प्रतिमा के विसर्जन की परंपरा चली आ रही थी, लेकिन इस बार से इसे समाप्त करने का फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि 15 सितंबर को गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। इसी दिन मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का भी शुभारंभ होगा।
गणेश चतुर्दशी के दिन मंडी शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा में शहर के विभिन्न देवी-देवता भी शामिल होंगे। गणेश जी की प्रतिमा को शोभायात्रा के माध्यम से पूरे शहर का भ्रमण करवाया जाएगा और इसके बाद प्रतिमा को वापस सिद्ध गणपति मंदिर लाकर स्थापित कर दिया जाएगा। इस प्रकार इस बार प्रतिमा को जल में प्रवाहित नहीं किया जाएगा।
उत्सव के दौरान मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ श्रद्धालुओं के लिए 23 और 25 सितंबर को विशाल भंडारों का आयोजन किया जाएगा। मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में मंदिर पहुंचकर भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने और प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया है।
नाग देवता धारण किए हुए हैं भगवान गणेश
छोटी काशी मंडी का प्राचीन सिद्ध गणपति मंदिर अपनी विशेष धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर में विराजमान भगवान गणेश के गले में नाग देवता विराजमान हैं। मान्यता के अनुसार इन्हें तांत्रिक सिद्धियों से परिपूर्ण गणपति माना जाता है। मंडी और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है। हर वर्ष गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।