अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए प्रस्तावित 1 लाख डॉलर की फीस से नौकरी का रास्ता हो सकता है महंगा
एजेंसी। नई दिल्ली
कनाडा और अमेरिका में पढ़ाई करने की योजना बना रहे भारतीय छात्रों के लिए वित्तीय चुनौतियां बढ़ गई हैं। कनाडा ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वीजा आवेदन के दौरान जरूरी जीवन-यापन खर्च की राशि बढ़ा दी है।
वहीं, अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की अनुमति पाने वाले विदेशी छात्रों के लिए 1 लाख अमेरिकी डॉलर की नई फीस प्रस्तावित की गई है। दोनों देशों के फैसलों का असर भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है, हालांकि अमेरिका में प्रस्तावित शुल्क अभी लागू नहीं हुआ है। कनाडा के आव्रजन, शरणार्थी और नागरिकता विभाग के नए नियमों के अनुसार, 1 सितंबर 2026 से स्टडी परमिट के लिए आवेदन करने वाले अकेले छात्र को अपने जीवन-यापन के खर्च के लिए कम से कम 23,448 कनाडाई डॉलर का वित्तीय प्रमाण देना होगा। भारतीय मुद्रा में यह राशि करीब 17 लाख रुपये बैठती है। यह रकम पहले के मुकाबले करीब 2 लाख रुपये अधिक है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्धारित राशि में कॉलेज या विश्वविद्यालय की ट्यूशन फीस और कनाडा पहुंचने का यात्रा खर्च शामिल नहीं है। यानी छात्र को इन दोनों खर्चों के लिए अलग से वित्तीय क्षमता साबित करनी होगी। 31 अगस्त 2026 तक आवेदन कर चुके छात्रों पर बढ़ी हुई सीमा लागू नहीं होगी।
वित्तीय तैयारी जरूरी: कनाडा में बढ़ी हुई वित्तीय सीमा और अमेरिका में प्रस्तावित शुल्क से यह स्पष्ट है कि विदेश में उच्च शिक्षा की योजना बनाते समय केवल ट्यूशन फीस का अनुमान पर्याप्त नहीं रहेगा। छात्रों को वीजा, रहने-खाने, यात्रा और पढ़ाई के बाद रोजगार से जुड़े संभावित खर्चों को भी ध्यान में रखना होगा। अमेरिका के प्रस्तावित शुल्क के मामले में अंतिम नियम आने तक छात्रों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
परिवार के साथ जाने पर ज्यादा फंड
कनाडा में छात्र के साथ परिवार के सदस्य जाने की स्थिति में वित्तीय जरूरत और बढ़ जाएगी। दो सदस्यों के लिए 29,185 कनाडाई डॉलर, तीन के लिए 35,880 डॉलर और चार सदस्यों के लिए 43,562 डॉलर का फंड दिखाना होगा। चार से अधिक सदस्यों वाले परिवार के लिए प्रत्येक अतिरिक्त सदस्य पर 6,315 डॉलर की राशि जोड़नी होगी। ये नियम क्यूबेक को छोड़कर कनाडा के अन्य हिस्सों के लिए हैं। सरकार ने जीवन-यापन की राशि में बदलाव को मौजूदा खर्च और महंगाई के अनुरूप बताया है। नए नियमों के तहत छात्रों को आवेदन से पहले अपनी वित्तीय क्षमता का अधिक स्पष्ट प्रमाण देना होगा।
अमेरिका में अलग चुनौती
अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करने वाले विदेशी छात्रों के लिए प्रस्तावित बदलाव अलग तरह की चुनौती पैदा कर सकता है। प्रस्ताव के तहत वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए 1 लाख डॉलर तक का शुल्क लगाया जा सकता है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 96 लाख रुपये है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अंतिम नियम के रूप में लागू नहीं हुआ है और इसके लिए आगे सार्वजनिक सुझाव व आपत्तियां मांगी जानी हैं।
भारतीय छात्रों पर असर
अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है। सामान्य पाठ्यक्रमों के छात्रों को इसके तहत 12 महीने तक काम करने का अवसर मिलता है, जबकि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित से जुड़े छात्रों को अतिरिक्त 24 महीने की अवधि मिल सकती है। अमेरिका में 3.63 लाख भारतीय छात्रों समेत करीब 11 लाख विदेशी छात्र हैं। इसी व्यवस्था के तहत वे रोजगार हासिल करते हैं।