summer express ,रेवाड़ी। एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर लौटे गांव सुलखा निवासी निशानेबाज कमलजीत का एयरपोर्ट पर परिजनों और समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। कमलजीत ने सुरुचि सिंह के साथ भारतीय जोड़ी के रूप में स्वर्ण पदक जीता। दोनों ने स्पर्धा में एशियन गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। कमलजीत की इस उपलब्धि से गांव सुलखा में खुशी का माहौल है।
कमलजीत ने हादसे में पैर टूटने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और निशानेबाजी में अपना करियर आगे बढ़ाया। वर्ष 2019 में सुलखा से रेवाड़ी कोचिंग के लिए जाते समय जिस टेंपो में वह सवार थे, उसका सड़क हादसा हो गया था। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कमलजीत गंभीर रूप से घायल हुए और उनका पैर टूट गया। उस समय वह एथलीट बनने का सपना देख रहे थे, लेकिन चोट के कारण उनका एथलेटिक्स का सफर रुक गया।
इसके बाद उनके चाचा शक्ति पाल ने उन्हें निशानेबाजी को करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। कमलजीत ने चोट के बावजूद अभ्यास जारी रखा और हादसे के करीब 20 दिन बाद ही ट्रायल में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन करते हुए अपनी पहचान बनाई। आगे चलकर उन्होंने जूनियर विश्व चैंपियनशिप और विश्व कप स्तर पर भी पदक जीते।
वर्ष 2023 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप और जूनियर विश्व कप में पदक जीतने के बाद कमलजीत ने भारतीय टीम के सीनियर सेटअप में जगह बनाई। एशियन गेम्स की मिश्रित टीम स्पर्धा में उन्हें अंतिम समय में मौका मिला। उन्होंने सुरुचि सिंह के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए इस अवसर को स्वर्ण पदक में बदल दिया।
कमलजीत के खेल सफर में परिवार को आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। हादसे के इलाज के खर्च के अलावा शूटिंग के उपकरण, प्रशिक्षण, यात्रा और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का खर्च भी परिवार पर रहा। उनके पिता रतीराम फैक्ट्री में काम करते हैं और परिवार के पास करीब पांच एकड़ कृषि भूमि है। सीमित आमदनी के बावजूद परिवार ने बेटे के खेल को जारी रखने के लिए अपनी बचत लगाई और जरूरत पड़ने पर कर्ज भी लिया।
निशानेबाजी के महंगे उपकरण और प्रशिक्षण के कारण एक समय कमलजीत ने शूटिंग छोड़ने का मन भी बनाया था, लेकिन परिवार और कोच के सहयोग से उन्होंने अभ्यास जारी रखा। पिता रतीराम और चाचा शक्ति पाल ने उनके करियर में लगातार उनका साथ दिया।
कमलजीत की मां राजबाला बेटे के घर लौटने का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि कमलजीत को चूरमा पसंद है और उसके लौटने पर वह चूरमा और गोंद के लड्डू बनाएंगी। स्वर्ण पदक जीतकर लौटे कमलजीत की उपलब्धि को परिजनों और ग्रामीणों ने पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया।