समर न्यूज | अमृतसर
पटियाला/अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने मंगलवार को पटियाला केंद्रीय जेल में बंद बलवंत सिंह राजोआणा से मुलाकात की।
इस दौरान उनकी सेहत, जेल में स्थिति और लंबे समय से लंबित कानूनी मामले पर चर्चा हुई। एसजीपीसी के अंतरिम कमेटी सदस्य सुरजीत सिंह गढ़ी भी मौजूद रहे।
राजोआणा पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में दोषी हैं और उन्हें 2007 में विशेष सीबीआई अदालत ने मृत्युदंड सुनाया था। उनकी ओर से दया याचिका लंबे समय से लंबित है। केंद्र सरकार ने सितंबर 2019 में गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर उनकी मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदलने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया।
मुलाकात के बाद ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि राजोआणा ने स्पष्ट किया है कि वह किसी प्रकार की “माफी की भीख” नहीं मांग रहे और सरकार उनके मामले में अंतिम निर्णय ले। उन्होंने कहा कि 2019 के प्रस्ताव के बाद भी मामला वर्षों से लंबित है और इसे अब और टालना उचित नहीं है।
गड़गज्ज ने दावा किया कि राजोआणा करीब 32 वर्षों से जेल में हैं और सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की कई बार सुनवाई हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय रहते कोई निर्णय नहीं लेती तो पांच सिंह साहिबान की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
हवारा के मामले का भी उठाया मुद्दा
जत्थेदार ने कहा कि मुलाकात के दौरान राजोआणा ने जगतार सिंह हवारा की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि हवारा को अपनी बुजुर्ग और बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल नहीं दी जा रही। इससे पहले भी ज्ञानी गड़गज्ज व एसजीपीसी नेतृत्व सरकार के रवैये पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने 2 अक्टूबर को बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर प्रस्तावित मार्च का समर्थन करने की बात भी कही।
धामी बोले- जल्द लिया जाएगा ठोस फैसला
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि राजोआणा ने एसजीपीसी की ओर से दाखिल दया याचिका और उससे जुड़े मामले के जल्द निपटारे की मांग की है। उन्होंने कहा कि राजोआणा लंबे समय से जेल में हैं और उनका मामला अब अंतिम निर्णय की मांग करता है।
हाल ही में राजोआणा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखकर अपनी दया याचिका पर जल्द और अंतिम फैसला लेने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि फैसला उनके पक्ष में हो या न हो, लेकिन मामले को अनिश्चितकाल तक लंबित न रखा जाए। धामी ने कहा कि एसजीपीसी राजोआणा, जगतार सिंह हवारा और अन्य बंदी सिखों के मामलों को लेकर अपनी मांग जारी रखेगी। उन्होंने बताया कि अब आगे की रणनीति पर पांच सिंह साहिबान की बैठक में विचार किया जाएगा।