summer express ,शिमला (संजू)। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के भीतर संभावित बिखराव और नई पार्टी के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस के नेता युद्धवीर बैंस ने कहा है कि पार्टी गठन को रोकने के लिए कांग्रेस आलाकमान को उनकी ओर से रखी गई चार प्रमुख मांगों को स्वीकार करना होगा। उन्होंने दावा किया कि दो दिन पहले पूर्व मंत्री प्रतिभा सिंह ने उनसे फोन पर बातचीत की थी और पार्टी में किसी भी तरह के विभाजन को रोकने तथा राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस पार्टी के गठन को टालने को लेकर चर्चा की थी।
युद्धवीर बैंस ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि उन्होंने प्रतिभा सिंह के साथ इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत की और अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। उनके अनुसार, यदि कांग्रेस आलाकमान इन मांगों को स्वीकार करता है तो नई पार्टी के गठन की प्रक्रिया को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी पहली मांग मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, सुनील शर्मा बिट्टू और नरेश चौहान को तत्काल सरकार से हटाने की है।
बैंस ने दूसरी मांग के तहत वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के लिए मेहनत करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सरकार और संगठन में उचित सम्मान और जिम्मेदारी देने की बात कही। उनका आरोप है कि ऐसे कई कर्मठ कार्यकर्ताओं को मौजूदा सरकार ने हाशिये पर कर दिया है। उन्होंने मांग की कि उन्हें संगठन और सरकार में उनका उचित स्थान दिया जाए।
तीसरी मांग हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से जुड़ी है। बैंस ने कहा कि वीरभद्र सिंह उनके मार्गदर्शक और हिमाचल के निर्माता रहे हैं तथा उन्हें पर्याप्त सम्मान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह की नीतियों और उनके कार्यों को उचित महत्व मिलना चाहिए।
चौथी मांग के तौर पर बैंस ने मुख्यमंत्री और उनके करीबियों पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए सरकारी स्तर पर उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इसके लिए एक समिति का गठन किया जाना जरूरी है।
युद्धवीर बैंस ने स्पष्ट किया कि यदि कांग्रेस आलाकमान उनकी इन मांगों को स्वीकार नहीं करता है तो राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष नई पार्टी के पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी वीरभद्र सिंह के नाम, उनकी नीतियों और उनके कार्यों को लेकर जनता के बीच जाएगी तथा आगामी चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ेगी।
उन्होंने कहा कि नई पार्टी के गठन का फैसला कांग्रेस आलाकमान के रुख पर निर्भर करेगा। फिलहाल उनके बयान के बाद हिमाचल की राजनीति में कांग्रेस के भीतर संभावित मतभेदों और नई राजनीतिक पार्टी की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।